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आईआईटी खड़गपुर एवं नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति खड़गपुर के संयुक्त तत्वावधान में भव्य साहित्यिक कार्यक्रमों का आयोजन

काव्यपाठ प्रतियोगिता, काव्य सृजन कार्यशाला, कवि सम्मेलन एवं पुरस्कार वितरण समारोह

खड़गपुर। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर एवं नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति खड़गपुर के संयुक्त तत्वावधान में 5 एवं 6 मई 2025 को गार्गी, मैत्री एवं नेताजी सभागार में भव्य साहित्यिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इन दो दिवसीय कार्यक्रमों में काव्यपाठ प्रतियोगिता, काव्य सृजन कार्यशाला, कवि सम्मेलन तथा पुरस्कार वितरण समारोह का सफल आयोजन हुआ।

दिनांक 5 मई 2025 को गार्गी, मैत्री, विक्रमशिला परिसर में काव्यपाठ प्रतियोगिता एवं काव्य सृजन कार्यशाला में लगभग 200 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया एवं अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। विद्यार्थियों ने विविध विषयों पर अन्य साहित्यकारों की तथा अपनी मौलिक एवं भावपूर्ण रचनाओं का पाठ किया, जिससे सभागार में साहित्यिक वातावरण का संचार हुआ।

काव्य सृजन कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों को कविता लेखन की बारीकियों, शिल्प एवं भाव-व्यंजनाओं पर विशेषज्ञों द्वारा मार्गदर्शन दिया गया। कार्यशाला में विद्यार्थियों ने अपने अनुभव साझा किए एवं वरिष्ठ कवियों से प्रेरणा प्राप्त की। काव्यपाठ प्रतियोगिता में प्रो. पंकज साहा, प्रो. प्रकाश अग्रवाल, आशुतोष मुन्ना सिंह, अमन शुक्ला, अजय चौरसिया, अपर्णा मिश्र, डॉ. सौरभ शर्मा, अक्षत डिमरी, मिताली शुक्ल एवं वेद प्रकाश मिश्र ने न्यायाधीश की भूमिका का निर्वाह किया और प्रतिभागियों को संबोधित किया।

आगरा से पधारी श्रंगार, ओज की प्रतिष्ठित हस्ताक्षर कवियत्री डॉ. रुचि चतुर्वेदी ने अपनी प्रसिद्ध रचनाओं से प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया और काव्य रचने के गुरुमंत्र भी साझा किए। पूरा गार्गी सभागार उनकी “बिंदु से रेखा बनाने चली हूँ” और “गणित जिंदगी का जब बिगाड़ेंगी सांसें” रचनाओं पर तालियों की सराहना से गूंज उठा।

5 मई 2025 की शाम नेताजी सभागार में एक अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। वरिष्ठ प्राध्यापक प्रो. एच.एन. मिश्र ने सभी कवियों एवं अतिथियों का परिचय कराते हुए कार्यक्रम की रुपरेखा प्रस्तुत की। एनसीसी के कमान अधिकारी ग्रुप कैप्टन के.पी. सिंह जी सभी कवियों का पुष्पगुच्छ से स्वागत किया।

मंच पर उपस्थित कवियों में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर के विद्यार्थीगण अक्षत डिमरी, अमन शुक्ला, अविकल श्रीवास्तव, सिद्धार्थ उपाध्याय, विद्या निवास मिश्र सहित कोलकाता से पधारे वेद प्रकाश मिश्र, आदित्य त्रिपाठी, डॉ. तारा दूगड़, डॉ. रुचि चतुर्वेदी (आगरा) एवं प्रो. प्रेम शंकर त्रिपाठी (उन्नाव) ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को अभिभूत कर दिया।

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कवियों ने श्रृंगार, राष्ट्रभावना, सामाजिक सरोकार एवं समसामयिक विषयों पर अपनी सशक्त कविताएं प्रस्तुत किया, जिन की श्रोताओं ने भरपूर सराहना की। एक ओर बलिया से पधारे कवि वेद प्रकाश मिश्र के गीत “एक तू न मिला रे ओ निर्मोही यूं तो मीत हजार मिले” पर भरपूर तालियां बजीं वहीं दूसरी ओर कोलकाता से पधारीं सुप्रसिद्ध साहित्यकार और हिंदी सलाहकार समिति की सदस्य डॉ. तारा दूगड़ ने शिव ओम अंबर, अनिल ओझा, विष्णुकांत शास्त्री एवं कन्हैयालाल सेतिया जी की रचनाओं का सस्वर पाठ कर श्रोताओं का मन मोह लिया।

आगरा से पधारी कवियत्री डॉ. रुचि चतुर्वेदी ने अपनी प्रतिनिधि रचनाओं से मन मोह लिया। उनके प्रिय गीतों को श्रोताओं ने बार बार सुनाने के लिए आग्रह किया और उन्होंने ‘बिंदु से रेखा बनाने चली हूँ, मैं सागर से गंगा मिलाने चली हूँ और “वही खुशुबुएं फिर से लाओगे कैसे, गणित जिंदगी का जब बिगाड़ेंगीं सासें अधर भी पहाड़े सुनाने लगेंगे” सुनाकर नेताजी प्रेक्षागृह में भाव रसधारा प्रवाहित कर दी।

प्रो. प्रेमशंकर त्रिपाठी जी ने अध्यक्षीय संबोधन में काव्य, साहित्य, सृजन, संस्कृति, समाज, संबंध एवं गीत परंपरा पर विद्वत संबोधन दिया। आपने रीतिकाल और भक्ति काल के कवियों की रचनाओं से संदर्भ देते हुए साहित्य सृजन की यात्रा में लाज से आज तक की साहित्यकि विवेचन की।

स्व. रमानाथ अवस्थी जी के कालजयी गीत “कुछ आंसू बन झर जाएंगे, कुछ दर्द चिता तक जाएंगे, इनमें ही एक दर्द तुम्हारा भी होगा” सुनाकर संपूर्ण श्रोतावर्ग को भवसागर में गोता लगवा दिया और ऐसा लगा जैसे कि सारा प्रेक्षागृह अपनी सुध बुध खो बैठा है।

श्रोताओं में आईआईटी खड़गपुर के अनेक प्राध्यापक, विद्यार्थी, परिसर से परिवार जन एवं खड़गपुर शहर के अनेक गणमान्य नागरिक एवं रेलवे के कई अधिकारी एवं ग्रीफिन्स इंटरनेशनल स्कूल के अध्यक्ष अभिषेक यादव, जी.पी. गाँधी आदि प्रमुख रहे।

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर एवं नगर राजभाषा कार्यान्वयन समिति खड़गपुर अध्यक्ष की ओर से प्रो. संजय कुमार चतुर्वेदी जी ने सभी कवियों को पुष्प गुच्छ एवं अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया।

दिनांक 6 मई 2025 को नेताजी प्रेक्षागृह में राजभाषा पुरस्कार वितरण समारोह आयोजित हुआ जिसमें वर्ष 2023 से लेकर 05 मई 2025 तक आयोजित सभी प्रतियोगिताओं के विजेताओं एवं सहभागियों को पुरस्कार प्रदान किए गए। सभी प्रतिभागियों को पुरस्कार में लोकप्रिय एवं पठनीय पुस्तकें प्रदान की जाती हैं जिससे समाज में विलुप्त हो रही पुस्तक संस्कृति की पुनः प्राण प्रतिष्ठा हो सके और बच्चे अपने खाली समय में हर समय मोबाइल, टीवी आदि से थोड़ा दूर होकर पुस्तक पढ़ने को प्रेरित हों। ज्ञान सिर्फ किताबी पढ़ाई ही नहीं होती बल्कि साहित्य एवं संस्कृति भी व्यक्तित्व विकास में अनिवार्य है ऐसा सभी वक्ताओं ने अपना मंतव्य प्रकट किया।

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प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त विद्यार्थियों के साथ ही 400 विद्यार्थियों को पुरस्कार एवं प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। पुरस्कार वितरण के दौरान विद्यार्थियों के उत्साह एवं साहित्यिक प्रतिभा की सराहना की गई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर एवं वाराणसी के निदेशक प्रो. अमित पात्र ने सभी प्रतिभागियों, कवियों एवं आयोजकों को संबोधित करते हुए आशीर्वाद एवं शुभकामनाएँ दीं।

आपने एक बांग्ला गीत का गायन भी किया और सभी से आह्वान किया कि वे अपनी पढ़ाई के साथ ही साहित्य और संस्कृति का आलंबन लें जिससे जीवन के उतार चढ़ावों में भी धीरज बनाए रखने का संयम आता है। सभी कार्यक्रमों का सफल संचालन डॉ. राजीव रावत ने किया, जिन्होंने सभी सत्रों को व्यवस्थित एवं रोचक बनाए रखा।

धन्यवाद ज्ञापन राणा विजय प्रताप ने किया उन्होंने सभी अतिथियों, कवियों, सहयोगियों, सुनील महतो, कालीचरण एवं मनोज आदि का सभी व्यवस्थाओं के लिए आभार व्यक्त किया। काव्य पाठ प्रतियोगिता के सभी न्यायाधीशों का हार्दिक आभार व्यक्त किया गया। न्याय मंडल के सदस्य प्रो. पंकज साहा, प्रो. प्रकाश अग्रवाल, आशुतोष सिंह, डॉ. सौरभ शर्मा, अक्षत डिमरी, अमन शुक्ला, मिताली शुक्ला, अजय चौरसिया, श्रीवेद मिश्र, अपर्णा मिश्र, विद्यानिवास मिश्र ने भी अपने विचार प्रस्तुत किए।

यह आयोजन न केवल विद्यार्थियों के साहित्यिक सांस्कृतिक उन्नयन का मंच बना, बल्कि खड़गपुर क्षेत्र में हिंदी काव्य एवं साहित्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विद्यार्थियों को रचनात्मक अभिव्यक्ति का अवसर मिला और प्रतिष्ठित कवियों से संवाद स्थापित करने का दुर्लभ अवसर प्राप्त हुआ। कार्यक्रम की सफलता ने यह सिद्ध किया कि तकनीकी संस्थानों में भी साहित्यिक गतिविधियाँ समान रूप से महत्वपूर्ण एवं प्रेरणादायक हैं।

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