सहायता का दिखावा बंद कर आम नागरिकों को राहत पहुँचाये सरकार

राज कुमार गुप्त, कोलकाता : वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण से सरकारी नौकरी करने वालों को छोड़कर सभी आम लोगों के आमदनी का जरिया लगभग ठप और हाल बेहाल है, ऐसे में पेट्रोल व डीजल के दाम लगभग सौ रुपए हो जाना, एवं केंद्र सरकार द्वारा गैस सिलिंडर के दामों में बढ़ोतरी कर जनता पर महंगाई की दोहरी चाबुक मार रही है। सरकार द्वारा बार-बार रसोई गैस के दामों में बढ़ोतरी करने से ज्यादातर आम लोगों को बड़ा झटका लगा है। ऊपर से पेट्रोल और डीजल के दामों में भी बढ़ोतरी होने से आम नागरिक सोच भी नहीं पा रहे हैं कि अपने परिवार का भरण पोषण कैसे करें। पेट्रोल और डीजल पर टैक्स केंद्र और सभी राज्य सरकारों के लिए एक दुधारू गाय है, इस पर सभी सरकारें अपनी मनमर्जी से टैक्स लादकर जनता से वसूलते रहती है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक पिछले साल अप्रैल-नवंबर में पेट्रोल व डीजल के उत्पाद शुल्क से केंद्र सरकार को 1,96,342 करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई जबकि उससे पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 1,32,899 करोड़ रुपये रहा था। अगर सरकार उत्पाद शुल्क में कटौती करती है तो सरकार का राजस्व और कम होगा, जिससे राजकोषीय घाटा प्रभावित होगा।अभी एक लीटर पेट्रोल की बिक्री होने पर उत्पाद शुल्क के रूप में केंद्र सरकार को 32.98 रुपये और डीजल पर 31.83 रुपये मिलते हैं। कोरोना काल में राज्यों की वित्तीय हालत भी खराब है। इसलिए राज्य सरकारें भी वैट में कटौती करने की पहल नहीं कर रहे हैं। राज्य पेट्रोल-डीजल पर 16 से 38% तक टैक्स वसूलते हैं।

अब वक्त आ गया है कि जनता सरकार से डीजल, पेट्रोल और रसोई गैस के दाम इतना अधिक बढ़ जाने पर जवाब मांगे। जब अपनी सरकारी तिजोरी भरनी हो तो इन सब के दाम बढ़ाकर जनता से लूटकर अपनी तिजोरी भर लो, वहीं देखे तो डीजल के दाम बढने से सबसे ज्यादा हमारे किसानों पर प्रभाव पड़ेगा पटवन का समय चल रहा है ऐसे में सरकार डीजल का दाम बढ़ाकर किसानों समेत आम जनता को और परेशानी में डाल रही है। तेल की कीमतें बढ़ने से माल ढुलाई का भी भाड़ा बढ़ेगा, इसके चलते हर वस्तु की कीमत भी बढ़ेगी जबकि रसोई गैस की बढ़ती कीमतें घर के बजट पर गहरा असर डालने लगी हैं।

जिसके चलते आम जनता विशेषकर गरीब व मध्यम वर्ग की परेशानियां बढ़नी शुरू हो गई हैं, हम सभी ने देखा कि वैश्विक महामारी में जब देशव्यापी लॉकडाउन लगाया गया था तो सबसे ज्यादा प्रभाव गरीब व मध्यम वर्गीय परिवार पर ही पड़ा और आज भी उसका असर साफ देखा जा रहा है। हम सभी देख रहे है कि कोविड-19 के कारण लंबे चले लॉकडॉउन से बिगड़ी अर्थव्यवस्था से जनता अभी पूरी तरह से उभर भी नहीं पाई है कि अब लगातार डीजल, पैट्रोल व रसोई गैस की कीमतों में बड़ा उछाल आना शुरू हो गया है।
इस उछाल के चलते देश में अब ट्रांस्पोर्टरों द्वारा माल भाड़ा बढ़ाए जाने पर भी विचार किया जाने लगा है। जबकि कई राज्यों में दस फीसदी तक माल भाड़ा बढ़ाया भी जा चुका है। इसके अलावा अब बसों का किराया बढ़ाने पर भी विचार होने लगा है, ज्यादातर ट्रांसपोर्टर इस इंतजार में हैं कि तेल की कीमतें कहां जाकर ठहरती हैं उसके बाद एक बार में ही माल भाड़े में बढ़ोतरी होना तय माना जा रहा है।

  1. बाजार की अगर बात करें तो अभी से ही कुछ वस्तु पर विशेषकर रोजमर्रा में प्रयोग होने वाली चीजों पर तेल की कीमतें बढ़ने का कुछ कुछ असर दिखने भी लगा है। जिसका सीधा असर गरीब व मध्यम वर्गीय परिवारों के बजट पर पड़ रहा है। अब केंद्र एवं राज्य सरकारों को विचार करना चाहिए कि कोरोना के चलते हर परिवार विशेष रूप से माध्यम वर्ग की अर्थव्यवस्था पहले से ही बुरी तरह से प्रभावित हो चुकी है, ऊपर से अब पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दामों में बेतहाशा बढ़ोतरी को झेल पाना कठिन हो जाएगा। अतः केंद्र एवं राज्य सरकारें इस पर गंभीरता से विचार करें, सिर्फ दिखावे के लिए सभी अपने-अपने बजट में लाखों करोड़ों रुपये की जनता को सुविधा देने का दिखावा बंद करें।
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