Global Handwashing Day 2025 marks the beginning of a new revolution in hygiene education

ग्लोबल हैंडवॉशिंग डे 2025 पर स्वच्छता शिक्षा में नई क्रांति की शुरुआत

अनिल बेदाग, मुंबई | 15 अक्टूबर 2025रेकिट के प्रमुख जनस्वास्थ्य अभियान डेटॉल बनेगा स्वस्थ इंडिया ने ग्लोबल हैंडवॉशिंग डे 2025 के अवसर पर भारत का पहला एकीकृत स्वच्छता शिक्षण प्लेटफ़ॉर्म‘हाइजीन बिल्डिंग ऐज़ लर्निंग एड (एच-बाला)’ लॉन्च किया। यह अभिनव मॉडल प्रभादेवी प्राइमरी मराठी स्कूल, वर्ली, मुंबई में शुरू किया गया है।

रेकिट के प्रमुख कार्यक्रम डेटॉल बनेगा स्वस्थ इंडिया ने ग्लोबल हैंडवॉशिंग डे 2025 के अवसर पर भारत का पहला एकीकृत स्वच्छता शिक्षण प्लेटफ़ॉर्म ‘हाइजीन बिल्डिंग ऐज़ लर्निंग एड ’ लॉन्च किया।

🎯 एच-बाला: क्या है यह मॉडल?

  • एच-बाला का उद्देश्य है स्कूल भवनों को हाइजीन लर्निंग हब्स में बदलना
  • यह बच्चों को स्वच्छता व्यवहार सिखाने के लिए भौतिक संरचनाओं को शिक्षण उपकरण में बदलता है
  • यह मॉडल शिक्षा और व्यवहार परिवर्तन को एकीकृत करता है

एच-बाला का 6सी दृष्टिकोण – करिकुलम, कम्युनिटीज़, कोलैबोरेशन, कैंपस, कनेक्ट और चिल्ड्रन – शिक्षा और स्वच्छता को जोड़कर बच्चों को सीखने का जीवंत अनुभव देता है। रेकिट इसे 20 शहरों तक विस्तार देने की योजना बना रहा है, ताकि स्वच्छता शिक्षा को नई दिशा दी जा सके।

🧩 6C दृष्टिकोण: शिक्षा और स्वच्छता का समन्वय

C अर्थ भूमिका
Curriculum पाठ्यक्रम स्वच्छता को शिक्षा से जोड़ना
Communities समुदाय सामूहिक भागीदारी और जागरूकता
Collaboration सहयोग सरकारी और निजी संस्थाओं का साथ
Campus परिसर स्कूल भवन को शिक्षण उपकरण बनाना
Connect जुड़ाव बच्चों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच संवाद
Children बच्चे केंद्र में बाल हित और व्यवहार परिवर्तन

रेकिट के कम्युनिकेशंस और कॉर्पोरेट अफेयर्स डायरेक्टर रवि भटनागर ने कहा, “एच-बाला सिर्फ एक पहल नहीं, बल्कि भारत की अगली पीढ़ी के स्वास्थ्य चैम्पियनों में निवेश है।”

🌍 राष्ट्रीय प्रभाव

  • डेटॉल बनेगा स्वस्थ इंडिया ने अब तक:
    • 28 राज्यों में
    • 8.4 लाख स्कूलों तक
    • 2.6 करोड़ बच्चों को स्वच्छता शिक्षा से जोड़ा
  • 12 वर्षों से यह भारत का सबसे प्रभावशाली जनस्वास्थ्य अभियान बना हुआ है
  • अब 20 शहरों में एच-बाला मॉडल को विस्तार देने की योजना

डेटॉल बनेगा स्वस्थ इंडिया ने अब तक 28 राज्यों के 8.4 लाख स्कूलों में 2.6 करोड़ से अधिक बच्चों तक पहुंच बनाई है। 12 वर्षों से यह कार्यक्रम स्वच्छता और व्यवहार परिवर्तन की दिशा में भारत के सबसे प्रभावशाली जनस्वास्थ्य अभियानों में से एक बन चुका है।

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