बदायूं, यूपी । कवि शैलेन्द्र मिश्र देव के ग़ज़ल संग्रह “गज़लों की छाँव में” का विमोचन भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव गुप्ता, पूर्व विधायक व वरिष्ठ भाजपा नेता प्रेम स्वरुप पाठक, कारागार अधिक्षक विनय कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आनंद प्रकाश शर्मा, खंड शिक्षा अधिकारी शशांक शुक्ला, अशोक पाठक, उस्ताद शायर विनय सागर जायसवाल, वरिष्ठ कवि शमशेर बहादुर आँचल भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष अमिता उपाध्याय द्वारा किया गया।

विमोचन के शुभ अवसर पर कवि शैलेन्द्र मिश्र देव की पुस्तक के सम्बन्ध में बोलते हुए भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव गुप्ता ने कहा कि इस पुस्तक की समस्त गज़लें बेहतरीन हैं और समाज को दिशा देने वाली हैं जिनको पढ़ कर एक सुखद अहसास होता है। पूर्व विधायक प्रेम स्वरुप पाठक ने कहा कि किसी भी कवि या लेखक की पुस्तक प्रकाशित होना उसके जीवन की महान उपलब्धि होती है मेरा आशीर्वाद है कि शैलेन्द्र नित नई उपलब्धि प्राप्त करें। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी आनंद प्रकाश शर्मा ने कहा कि शैलेन्द्र हमारे विभाग का एक होनहार शिक्षक है ये जीवन में निरंतर प्रगति करे।

उस्ताद शायर विनय सागर जायसवाल ने कहा कि शैलेन्द्र मेरा सबसे कमजोर शिष्य था लेकिन इसने अपनी मेनहत और लगन से ये मुकाम हासिल किया है इसके लिए बहुत बहुत बधाई। दिल्ली से पधारे कवि रंजीत शर्मा रंग ने कवि शैलेन्द्र मिश्र देव को पुस्तक विमोचन के अवसर पर पंडित श्री राम शर्मा आचार्य स्मृति सम्मान अपनी संस्था द्वारा प्रदान कर सम्मानित किया। इनके अलावा जेल अधीक्षक विनय कुमार, कवि शमशेर बहादुर आँचल, आनंद पाठक, ग़ज़ल राज, राजेश शर्मा और बदायूँ के ओज कवि कामेश पाठक ने अपने विचार व्यक्त किये।

पुस्तक विमोचन के उपरान्त कवि सम्मलेन का आयोजन किया गया जिसमे कवि अचीन मासूम द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई,
कवि आनंद पाठक ने पढ़ा –
कौन से मुँह से मियाँ हक़ की करेंगे बातें,
भेड़ बकरी की तरह घेर के लाये हुए लोग।

शैलेन्द्र मिश्र देव ने पढ़ा –
देर लगी है माना हमने,
खूब मगर पहचाना हमने।
वो तो पूरा पागल निकला,
जिसको समझा दाना हमने।

कवि राजेश शर्मा ने कहा –
बहुत बदनाम हूँ यारों कि मैं श्रंगार लिखता हूँ,
बसा नस-नस में जो मेरे वही अशआर लिखता हूँ।

कवि रंजीत रंग ने कहा –
शैलेन्द्र जी को पुस्तक की लाखों बधाई हैं,
बड़ी मेंहनत से ये शुभ घड़ी आई है।

बरेली से पधारे ग़ज़लराज जी ने कहा –
जो दिल उनका शीशा अगर हो रहा है
ये उल्फत का मेरी असर हो रहा है

कामेश पाठक जी ने कहा –
दीनों के हैं नाथ शम्भू त्रिपुरारी हैं,

शमशेर बहादुर आँचल जी ने पढ़ा –
बड़ा वो है जिसे दुनिया बड़ा समझें बड़ा माने,
निराला नाम रखने से निराला कौन होता है।

बरेली से आये उस्ताद शायर विनय सागर जायसवाल जी ने कहा –
तुझे खबर है मेरा बुत तराशने बाले,
यहाँ कई लोग हैं मेरा सर उतारने बाले।

इसके अलावा सुनील शर्मा, पवन शंखधार, शटवदन शंखधार, विष्णु असवा उज्जवल वशिष्ठ, अजित सुभाषित, सरिता चौहान आदि ने भी अपना काव्य पाठ किया। इस अवसर पर पुष्पेंद्र शर्मा, देवेंद्र पाल मिश्रा, बासुदेव मिश्र, अवधेश पाठक, अनुज मिश्रा, अरविन्द दीक्षित, परमवीर नितिन पटेल, दीपू यादव आदि उपस्थित रहे, कार्यक्रम का सफल संचालन सुनील शर्मा व पवन शांखधार ने किया।12c669b8-fd2a-4c8a-a6d2-f77fe74846ca

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