कोलकाता, 10 फरवरी 2026: पीरियड्स शुरू होते ही कई महिलाओं को तेज दर्द, ऐंठन, पेट में सूजन और कमर में खिंचाव की शिकायत होती है। यह कष्ट इतना गंभीर हो जाता है कि कई बार रोजमर्रा का काम भी मुश्किल लगता है।
हर बार पेनकिलर लेना सेहत के लिए ठीक नहीं। ऐसे में योग एक प्राकृतिक और सुरक्षित राहत दे सकता है। गर्भासन (Garbhasana) पीरियड्स के दर्द में बहुत प्रभावी माना जाता है।
मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा (MDNIY) ने इसे महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य और मासिक चक्र को नियमित करने के लिए खास तौर पर फायदेमंद बताया है।

गर्भासन क्यों खास है?
- गर्भाशय की मांसपेशियों को मजबूत और लचीला बनाता है।
- पीरियड्स के दौरान होने वाली ऐंठन, दर्द और सूजन में राहत देता है।
- तनाव, चिंता और मूड स्विंग्स को कम करता है।
- एकाग्रता और मानसिक शांति बढ़ाता है।
- नियमित अभ्यास से मासिक चक्र नियमित होता है।
गर्भासन कैसे करें? (स्टेप-बाय-स्टेप)
एक्सपर्ट्स के अनुसार, गर्भासन शुरू करने से पहले कुछ दिन कुक्कटासन (Kukkutasana) का अभ्यास जरूर करें। इससे शरीर का संतुलन और कोर ताकत बढ़ती है।
- तैयारी: सबसे पहले पद्मासन (कमलासन) में बैठें।
- हाथों की स्थिति: दोनों हाथों को जांघों और पिंडलियों के बीच फंसाएं।
- कोहनियां बाहर निकालें: कोहनियों को मोड़कर बाहर की ओर निकालें।
- कान पकड़ें: दोनों हाथों से अपने कान पकड़ने की कोशिश करें।
- शरीर संतुलित करें: पूरा भार कूल्हों पर रहे। पैर और हाथों का संतुलन बनाएं।
- समय: शुरुआत में 30 सेकंड से 1 मिनट तक रहें। धीरे-धीरे समय बढ़ाएं।
- सांस: गहरी और नियमित सांस लें।
- वापसी: धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में आएं।
कब और कैसे करें?
- सबसे अच्छा समय: सुबह खाली पेट।
- अवधि: रोजाना 1-3 मिनट (धीरे-धीरे बढ़ाएं)।
- सावधानियां:
- गर्दन, कंधे, कमर या घुटनों में कोई गंभीर समस्या हो तो डॉक्टर या योग एक्सपर्ट से सलाह लें।
- गर्भावस्था में या हाल ही में सर्जरी हुई हो तो न करें।
- शुरुआत में योग टीचर की निगरानी में करें।
एक्सपर्ट्स की राय
मोरारजी देसाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ योगा के विशेषज्ञों के अनुसार: “गर्भासन प्रजनन अंगों में रक्त संचार बढ़ाता है, हार्मोनल संतुलन बनाता है और पीरियड्स से जुड़ी कई समस्याओं में राहत देता है। यह तनाव दूर कर शरीर-मन को संतुलित रखने में भी मदद करता है।”
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