गांधी जी आज भी महत्वपूर्ण है और कल भी महत्वपूर्ण रहेंगे- डॉ. अंजना संधीर

उज्जैन : प्रतिष्ठित संस्था राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना के तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जयंती के अवसर पर भारत माता राष्ट्र वंदना काव्य गोष्ठी, अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसकी मुख्य अतिथि डॉ. अंजना संधीर थी। मुख्य वक्ता डॉ. मुक्ता कान्हा कौशिक मुख्य राष्ट्रीय प्रवक्ता, रायपुर, अध्यक्षता डॉ. शिवा लोहारिया द्वारा की गयी।

विद्यापीठ के भाषा भवन में सौ साल पहले गांधी जी के चरण लगे थे।विद्यापीठ की दुनिया में गांधी जी की विशेष पहचान है। साथ ही बताया कि महात्मा गांधी ने गुजरात में तकली और सूत की पहचान करायी और विद्यार्थी तकली और सूत का काम स्वयं करते हैं। विद्यापीठ में सादा जीवन उच्च विचार का भाव लेकर गांधीजी के रास्ते पर चलते है।

तकली कातना, चरखा चलाने का काम कुलपति, शिक्षक के द्वारा भी किया जाता है। प्रार्थना हाल में भी सभी जमीन पर सोते हैं, पढ़ते हैं। विद्यापीठ के विद्यार्थी ही साफ-सफाई, खाना बनाना आदि काम करते हैं और सूत कातने का भी काम करते हैं तथा शिक्षा भी ग्रहण करते हैं। साथ ही डॉ.अंजना संधीर ने गांधी जी के भजन सुनायी-
वैष्णव जन ,तो तेने कहिये,
जे पीर पराई जाणे रे,सुनाया।

मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. मुक्ता कान्हा कौशिक ने अपने उद्बोधन में कहा कि सत्य और अहिंसा को लेकर बापू के विचार हमेशा से न सिर्फ भारत बल्कि पूरे विश्व का मार्गदर्शन करते है और आगे भी करते रहेंगे। गांधी जी ने भारतीय समाज में व्याप्त छुआछूत जैसी बुराइयों के प्रति भी लगातार आवाज उठाई। वे चाहते थे कि ऐसा समाज बने जिसमें सभी लोगों को बराबरी का दर्जा हासिल हो।

साथ ही कहा कि हम सभी गांधी जी का सम्मान करते हैं लेकिन उनके सपने तो तभी पूरे होंगे जब हम उनके बताए शांति,अहिंसा, सत्य, समानता, महिलाओं के प्रति सम्मान जैसे आदर्श पर चलेंगे अतः हमें उनके विचारों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प करना चाहिए। साथ ही उन्होंने बापू जी पर कविता प्रस्तुत की-
गांधी जी तुम बड़े महान
सबको लगते हैं तुम महान,
देश के खातिर तुमनें गवां दी जान,
सबसे प्यारा किया है काम, गांधीजी तुम बड़े महान।

श्रीमती सुवर्णा जाधव, मुख्य कार्यकारी अध्यक्ष, मुंबई ने अपने प्रस्ताविक भाषण में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना साहित्य उपक्रमों को बढ़ावा दे रही है। हमारे देश की स्वतंत्रता में बापूजी का महत्वपूर्ण स्थान है साथ ही काव्य प्रस्तुति में कहा – व्यक्ति मरता है, विचार कभी नहीं मरता।

कवयित्री डॉ. चेतना उपाध्याय ने काव्य प्रस्तुति में कहा कि, भारत में दो फूल खिले, गांधीजी और शास्त्री जी थे।

कवयित्री गरिमा गर्ग ने अपने काव्य प्रस्तुति में कहा –
मां भारती के लाल, तेरी जय जयकार गाएंगे।

कवयित्री संगीता की काव्य प्रस्तुति –
सीधा-सादा लिबास पहन, ली लाठी हाथ में
देश को आजादी दिलायी, पथ अहिंसा का जोड़ा।

डॉ. प्रभु चौधरी, राष्ट्रीय महासचिव ने कहा बापू ने देश को अंग्रेजों के चंगुल से आजाद करवाने में सबसे अहम भूमिका निभाई। उन्होंने अपने सत्य और अहिंसा के सिद्धांत के दम पर अंग्रेजों को कई बार घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया।

डॉ. रश्मि चौबे की काव्य प्रस्तुति-
यह देश सभी धर्मों को अपनाता है, ऐसे भारत को प्रणाम है, यह देश महान है।

अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. शिवा लोहारिया, महिला इकाई अध्यक्ष, जयपुर ने कहा महात्मा गांधी प्राकृतिक नेता भी रहे उन्होंने रिटर्न टू नेचर को महत्व दिया।

कार्यक्रम का प्रारंभ डॉ. रश्मि चौबे की सरस्वती वंदना से हुआ। स्वागत भाषण डॉ. रजिया शेख ने किया और दो लाइन की प्रस्तुति दी –बापू हम सब एक हैं, आपकी हैं संतान।

डॉ. रश्मि चौबे ने सफल संचालन करते हुए सभी अतिथि गणों का आभार व्यक्त किया।

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