दार्जिलिंग। तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो एवं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बोगतुई नरसंहार पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा को सौंपी गई प्रदेश भाजपा की रिपोर्ट पर बुधवार को नाराजगी जतायी। बनर्जी ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा,“हमने जांच में पूरी सहायता की है। हालांकि, बीरभूम जिले के रामपुरहाट के पास बोगतुई गांव में आए भाजपा नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष को सूचना दी। इस तरह की रिपोर्ट से जांच कमजोर हो सकती है और इसका राजनीतिक उद्देश्यों के लिए दुरुपयोग किया जा सकता है।” बनर्जी ने आरोप लगाया कि रिपोर्ट में तृणमूल कांग्रेस के बीरभूम जिला अध्यक्ष अनुव्रत मंडल के नाम का उल्लेख है, जो स्पष्ट रूप से भाजपा के प्रतिशोधी रवैये को दर्शाता है।

उन्होंने सीधे भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, “जांच के दौरान कोई राजनीतिक प्रभाव नहीं होना चाहिए। यह सत्ता का दुरुपयोग है।” भाजपा की रिपोर्ट में अनुव्रत मंडल का जिक्र करते हुए सुश्री बनर्जी ने कहा,“भाजपा चाहती है कि तृणमूल जिलाध्यक्ष को गिरफ्तार किया जाए। रिपोर्ट प्रतिशोधी है। भाजपा के खिलाफ बोलने वाली सभी पार्टियों के खिलाफ ऐसी प्रतिशोधी राजनीति की जाएगी। इस मसले पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी भी जताई है। उन्होंने राजनीतिक दल के सदस्यों की रिपोर्ट तैयार करने के उद्देश्य पर सवाल उठाया।

प्रारंभ में, रिपोर्ट में बोगतुई घटना में राज्य सरकार की भूमिका की तीखी आलोचना की गयी है। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि बंगाल में माफिया राज स्थापित हो गया है। इतना ही नहीं, रिपोर्ट में इस मामले में राज्य सरकार के समर्थन का भी जिक्र है। रिपोर्ट में कहा गया,“पश्चिम बंगाल में अब माफिया का शासन है। इसे राज्य की पुलिस और राजनीतिक नेतृत्व का पूरा समर्थन प्राप्त है।” प्रदेश भाजपा प्रमुख सुकांत मजूमदार की अध्यक्षता वाली एक जांच समिति, जो बीरभूम नरसंहार स्थल से लौटी थी, ने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार को ‘माफिया’ से कम नहीं बताया।

रिपोर्ट में कहा गया कि राज्य सरकार पुलिस और राजनीतिक नेतृत्व की मिलीभगत से शासन कर रही है। मजूमदार ने कहा, “पश्चिम बंगाल में कानून का पालन करने वाले नागरिकों का सरकार और टीएमसी शासन के तरीके पर से विश्वास खत्म हो चुका है, क्योंकि कानून अधिकारी खुद टीएमसी पदानुक्रम में दलदल बन गए हैं।” रिपोर्ट में कहा गया, “तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व में माफिया पुलिस और राजनीतिक नेतृत्व की मिलीभगत से पश्चिम बंगाल में शासन कर रहे हैं। कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।

बीरभूम हिंसा के बाद, भाजपा प्रमुख जेपी नड्डा ने पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया था जिसमें चार पूर्व आईपीएस अधिकारी और पश्चिम बंगाल राज्य भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार शामिल थे। चार पूर्व आईपीएस अधिकारी भारती घोष, सत्य पाल सिंह, केसी राममूर्ति और बृजलाल इस जांच समिति में शामिल थे। बीरभूम नरसंहार में सोमवार को मरने वालों की संख्या बढ़कर नौ हो गई क्योंकि एक और घायल महिला ने दम तोड़ दिया।

पिछले सप्ताह बीरभूम जिले के बोगटतुई गांव में पेट्रोल बम हमले में वह कई अन्य लोगों के साथ जल गई थी जिसके कारण राज्य विधानसभा में भी हंगामा और मारपीट भी हुई थी। गौरतलब है कि 21 मार्च की सुबह अज्ञात हमलावरों ने रामपुरहाट के पास बोगतुई गांव में 10 घरों पर पेट्रोल बमों से हमला कर उन्हें आग के हवाले कर दिया, जिससे आठ लोगों की मौत हो गई।

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