Raksha bandhan

इतिहास के झरोखे से…राखी की लाज की सच्चाई!

विनय सिंह बैस, नई दिल्ली। बचपन मे उत्तर प्रदेश बोर्ड की प्राथमिक कक्षा में एक कहानी पढ़ी थी “राखी की लाज”। जिसमे पढ़ाया गया था कि चित्तौड़गढ़ की महारानी कर्णावती गुजरात के शासक बहादुर शाह के हमले से रक्षा के लिए मुगल बादशाह हुमायूं को राखी भेजती है और उदार, सच्चरित्र, सेक्युलर हुमायूं, रानी कर्णावती की राखी की लाज रखते हुए बहादुर शाह से उसकी रक्षा करता है।

जब बड़े हुए तो पता चला कि रानी कर्णावती ने हुमायूं से सहायता तो जरूर माँगी थी और हुमांयू , रानी की सहायता के लिए आगरा से ग्वालियर तक पहुंच भी गया था। लेकिन तभी उसे बहादुरशाह का पत्र प्राप्त होता है जिसमें वह लिखता है कि उसकी लड़ाई एक ‘काफ़िर’ के विरुद्ध है, इसलिए आप दखल न दें क्योंकि हम दोनों ही ‘दीन वाले’ हैं।

इतिहासकार सतीश चंद्रा अपनी पुस्तक ‘History Of Medieval India‘ में लिखते हैं कि किसी भी तत्कालीन लेखक ने कर्णावती द्वारा हुमायूँ को राखी भेजने की किसी भी घटना का कोई उल्लेख नहीं किया है। पुस्तक ‘The History of India for Children (Vol. 2): FROM THE MUGHALS TO THE PRESENT’ में अर्चना गरोदिया गुप्ता और और श्रुति गरोदिया लिखती हैं कि हुमायूँ तो चित्तौड़ पर सुल्तान बहादुर शाह के कब्जे के कई महीनों बाद चित्तौड़ पहुँचा था। वो तो प्रतीक्षा कर रहा था कि कब मेवाड़ का साम्राज्य ध्वस्त हो। इस दौरान बहादुर शाह खुलेआम चित्तौड़ में मारकाट और लूटपाट मचाता रहा। उसके मंत्रियों ने उसे कह रखा था कि वो एक काफिर से लड़ रहा है, इसीलिए मुस्लिम होने के नाते हुमायूँ उसे नुकसान नहीं पहुँचाएगा।

यह भी पढ़ें:  हिंदी के प्रख्यात आलोचक मैनेजर पाण्डेय नहीं रहे

चित्तौड़ युद्ध के बीच, हुमायूँ और बहादुर शाह के बीच पत्राचार भी हुआ था, जिसका वर्णन एस.के. बनर्जी ने अपनी पुस्तक ‘हुमायूँ बादशाह‘ में किया है। बहादुर शाह ने पत्र लिख कर हुमायूँ को बताया था कि वो काफिरों को मार रहा है। प्रत्युत्तर में हुमायूँ ने लिखा था कि उसके दिल का दर्द ये सोच कर खून में बदल गया है कि एक होने के बावजूद हम दो हैं। हुमायूं को यह बात तुरंत ही समझ आ गई क्योंकि रानी पर आक्रमण करने वाला मुसलमान था और रानी काफ़िर। इसलिए वह चित्तौड़गढ़ के पूरी तरह बर्बाद हो जाने तथा रानी कर्णावती के अन्य नारियों सहित जौहर करने का इंतजार करता रहा।

सच यह कि वास्तविक इतिहास में कहीं भी इस तथाकथित गंगा-जमुनी घटना का जिक्र नहीं है। वस्तुतः इस मनगढ़ंत कहानी में लेशमात्र भी सच्चाई नहीं है लेकिन वर्षो तक हमारे बालमन को इस सफेद झूठ की घुट्टी पिलाई जाती रही। इस कहानी को एक हिन्दू त्यौहार से जोड़ कर रक्षाबंधन को कलंकित करने की कोशिश की गई।

बुद्धिजीवी इतिहासकारों की तरह ही सेक्युलर बॉलीवुड भी हमे अब तक अकबर की महानता, टीपू सुल्तान की वीरता और रजिया बेगम का साहस दिखाता आया है। छत्ता बाजार का सच, जजिया कर किस पर और क्यों लगाया जाता रहा, कर्नाटक के ब्राह्मणों के नरसंहारकर्ता का नाम जैसे सच हमसे छुपाए जाते रहे।

यह भी पढ़ें:  सीआईडी फेम दयानंद शेट्टी ने कोलकाता में "ड्रीम हाउस गैलेरिया" स्टोर का किया उद्घाटन

सेक्युलर बॉलीवुड को राणा कुंभा, राणा सांगा, महाराणा प्रताप, वीर शिवाजी जैसे महान योद्धाओं पर मूवी बनाने की कभी नहीं सूझी, क्योंकि यह सभी महापुरुष सेक्युलरिज्म के खांचे में फिट नहीं बैठे।

इस पर तुर्रा यह कि कुछ अति सेक्युलर इतिहासकार हमें ज्ञान दे रहे कि ‘बहन और बीवी में अंतर न करने वालों’ को भारत मे राखी का त्यौहार शुरू करने का श्रेय जाता है। जिन लोगों ने भारत की बहन, बेटियों का बलात्कार किया, जिनके कारण हज़ारों-हज़ार देवियों को बार-बार जौहर करना पड़ा, उन्हें ही ‘भाई और रक्षक’ बता दिया।

(विनय सिंह बैस)
एन्टी सेक्युलर

विनय सिंह बैस, लेखक/अनुवाद अधिकारी

(स्पष्टीकरण : इस आलेख में दिए गए विचार लेखक के हैं और इसे ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है।)

ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे कोलकाता हिन्दी न्यूज चैनल पेज को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। एक्स (ट्विटर) पर @hindi_kolkata नाम से सर्च करफॉलो करें।

Kolkata News Desk Avatar

Kolkata News Desk

News Editor MA

कोलकाता और पश्चिम बंगाल की ब्रेकिंग न्यूज, स्थानीय घटनाओं, खेल, राजनीति और सामाजिक मुद्दों की खबरों को कवर करता है। हमारी डेस्क टीम 24×7 सक्रिय रहकर पाठकों को ताज़ा और प्रमाणिक जानकारी उपलब्ध कराती है।

यह भी पढ़ें:  सविता शाह की कविता
Areas of Expertise: Sports, Politics & West Bengal
Fact Checked & Editorial Guidelines

Our Fact Checking Process

We prioritize accuracy and integrity in our content. Here's how we maintain high standards:

  1. Expert Review: All articles are reviewed by subject matter experts.
  2. Source Validation: Information is backed by credible, up-to-date sources.
  3. Transparency: We clearly cite references and disclose potential conflicts.
Reviewed by: Subject Matter Experts

Our Review Board

Our content is carefully reviewed by experienced professionals to ensure accuracy and relevance.

  • Qualified Experts: Each article is assessed by specialists with field-specific knowledge.
  • Up-to-date Insights: We incorporate the latest research, trends, and standards.
  • Commitment to Quality: Reviewers ensure clarity, correctness, and completeness.

Look for the expert-reviewed label to read content you can trust.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

2 × 2 =