नई दिल्ली । बहुत साल पहले जंबो द्वीप के एक छोटे से गांव में एक भोला-भाला धोबी रहता था। वह अपने गधे के बच्चे को बहुत ज्यादा प्यार करता था। धोबी गधे के बच्चे को रोज नरम-नरम, हरी-हरी घास खिलाता, उसके ऊपर कपड़े के छोटे-छोटे गट्ठर लादता। वह गधे के बच्चे को इतना प्यार करता था कि उसे गधा न कहकर प्यार से “गुड्डू” कहता था। एक दिन धोबी अपने गुड्डू पर कपड़ों की छोटी सी गठरी लादकर अपने घर की तरफ जा रहा था कि तेज आवाज सुनकर उसके कदम ठिठक गए। धोबी देखता है कि सामने वाले विद्यालय से गुरुजी एक बच्चे को गुस्से में डांट रहे थे :-
“पढ़ाई तो तुम्हारे भेजे में घुसा कर रहूंगा, प्यार से या मार से। तुम्हारे जैसे न जाने कितने गधों को मैंने कलेक्टर बना दिया है। तुम किस खेत की मूली हो?”

यह सुनते ही धोबी भागा हुआ गुरुजी के पास पहुंचा और प्रणाम करके बोला :-
“गुरु जी, मुझे आप जैसे किसी योग्य गुरु की ही तलाश थी। आप मेरे गुड्डू को भी पढ़ा-लिखाकर कलेक्टर बना दीजिए न??”
गुरुजी बोले :- “ठीक है। गुड्डू का विद्यालय में नाम लिखा दो। कल से उसकी भी पढ़ाई चालू हो जाएगी।”
“गुरु जी, गुड्डू हमारे साथ ही आया है। उसकी पढ़ाई आज से ही शुरु करा दो ताकि वह जल्दी से कलेक्टर बन जाए।” धोबी अधीर हो चला था।
“कहां है तुम्हारा गुड्डू ” गुरुजी ने पूछा।
धोबी बोला:- “गुरु जी वह खड़ा है हमारा गुडडू। कपड़ों का छोटा सा गट्ठर लादे हुए।”

गुरुजी आश्चर्यचकित हो गए। वह गुस्से में बोले :- “मैं बच्चों को पढ़ाता हूं , गधों को नहीं”
इस पर भोला धोबी बोला :- “अभी तो आप कह रहे थे कि आपने न जाने कितने गधों को कलेक्टर बना दिया है। तो मेरे गुड्डू को भी कलेक्टर बना दो न गुरुजी।”
गुरुजी मना करते रहे लेकिन धोबी नहीं माना। वह गुडडू को कलेक्टर बनाने की जिद पर अड़ गया और गुरूजी के पैरों पर गिर पड़ा। गुरु जी ने हारकर कहा :-“ठीक है अपने गुड्डू को यही छोड़े जाओ। मैं उसे पढ़ा लिखाकर कलेक्टर बना दूंगा। लेकिन शर्त यह कि बार-बार हालचाल पूछने न आना। जब कलेक्टर बन जाएगा तब मैं तुम्हें खुद ही बता दूंगा।”

उस समय मद्दे का जमाना था। गुरु जी ने धोबी के जाते ही गधे को ₹20 में बेच दिया और उस पैसे से बच्चों को मिठाई खिला दी। इस बात को बरसों बीत गए। एक दिन धोबी को गुड्डू की बहुत याद आ रही थी, उस से रहा न गया। वह सकुचाते हुए गुरुजी के पास पहुंचा और गुरु जी से हाथ जोड़कर पूछा :- “गुरुजी हमारा गुड्डू अब तक कलेक्टर बना कि नहीं??”
गुरु जी तो गधे वाली बात मिठाई खिलाकर भूल ही चुके थे। लेकिन फिर भी उन्हें कोई जवाब तो देना ही था। तो गुरु जी बोले :-“हां तुम्हारा गुड्डू मगध राज्य के लखीसराय जिले में कलेक्टर बन गया है। जाकर उस से मिल लो”

इतना सुनते ही धोबी भागता हुआ घर गया। अपनी धोबिन को खुशखबरी सुनाई। मोहल्ले में लड्डू बांटे। फिर धोबिन ने गुडडू के लिए पेड़े तैयार किये। धोबी ने अपने सबसे अच्छे वाले कुर्ता पायजामा को बढ़िया से धुला, उसमें नील-टीनोपाल डाला और फिर कुर्ते पायजामे को प्रेस करके उस से मैचिंग एक अंगौछा गले में डालकर तैयार हो गया अपने गुड्डू से मिलने के लिए। साथ मे धोबिन को भी ले लिया और सीधा लखीसराय पहुंच गया। पूछते हुए कलेक्टर ऑफिस पहुंचा तो वहां कलेक्टर का चपरासी पैंट शर्ट पहने हुए बाहर खड़ा था। धोबी-धोबिन उससे बोले :- ‘हमारे गुड्डू से कहो कि उसके मां-बाबूजी गांव से उससे मिलने आए हैं।”

अंग्रेजी मीडियम से पढ़े हुए कलेक्टर ने यह बात सुनी। उसने सोचा कि अपने मॉम-डैड से तो मैंने अपनी मैरिज के कुछ साल बाद ही ब्रेक-अप कर लिया था, फिर यह कौन से मां-बाबूजी हमसे मिलने आए हैं?? खैर उन्हें अंदर बुलाया गया।”

धोबी-धोबिन जैसे ही अंदर घुसे। कोट-पैंट पहने गुड्डू को धोबी का कुर्ता-पायजामा देखते ही जोर से गुस्सा आ गया। उसे कुर्ता-धोती, कुर्ता-पायजामा जैसे किसी भी भारतीय परिधान से चिढ़ थी। लेकिन धोबी-धोबिन अपनी रौ में थे। वे दोनों उसे देखते ही गले लगाने दौड़ पड़े। मैकाले के चेले कलेक्टर ने उन्हें दूर से ही ‘हट- हट- हट’ करके पास आने से रोका। लेकिन वह दोनों नहीं माने। धोबी दाएं तरफ से और धोबिन बाएं तरफ से कलेक्टर को जबरन जोर से लिपट गए।

कलेक्टर ड्रेस को लेकर बड़ा संवेदनशील था। देशी भारतीय ड्रेस से अपनी अंग्रेजी ड्रेस टच होते ही उसे बहुत तेज़ गुस्सा आ गया। उसने कलक्टरगिरी को ताक पर रखकर दाईं लात धोबी को और बाईं लात धोबिन को एक साथ मार दी।
धोबी-धोबिन दोनों जमीन पर गिर पड़े और उठते ही दोगुना खुश होकर बोले :-
“हमारा गुड्डू कलेक्टर बन गया लेकिन उसने हींचो-हींचो करना (हट-हट करना) और दुलत्ती मारना नहीं छोड़ा।”

Vinay Singh
विनय सिंह बैस

(विनय सिंह बैस)
शिक्षक पुत्र

(नोट : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी व व्यक्तिगत है। इस आलेख में दी गई सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई है।)

Shrestha Sharad Samman Awards

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

3 × 1 =