IMG 20260729

विनय सिंह बैस कि कलम से – गुरुपूर्णिमा

नई दिल्ली। वायुसेना से सेवानिवृत्त होने के पश्चात वर्तमान संस्थान में जब मैं नया-नया आया, तो हमारी ब्रांच में एक शांत, सौम्य और सुदर्शन व्यक्तित्व के अधिकारी थे। मैंने नोट किया कि जो भी उन्हें मिलने आता उन्हें “गुरुजी” कहकर संबोधित करता था। ब्रांच के भी अधिकतर लोग उन्हें “गुरुजी” ही कहते थे।

शुरू में मुझे लगा कि शायद वे सचिवालय में आने से पहले शिक्षक रहे होंगे, इसलिए लोग उन्हें गुरुजी कहते हैं। या फिर शायद ब्राह्मण होंगे, पूजा-पाठ कराते होंगे, इसलिए गुरुजी कहे जाते होंगे। या फिर हो सकता है किसी धार्मिक संस्था से जुड़े होंगे, इसलिए लोग उन्हें गुरुजी कहते होंगे। परंतु धीरे-धीरे मुझे पता चला कि मेरे सभी कयास, सभी अनुमान गलत थे।

असल में, जिन्हें लोग “गुरुजी” कहते थे, उनका वास्तविक नाम श्री राजेश सिंह शेखावत था। वे सचिवालय में राजपत्रित अधिकारी थे। उनकी पत्नी सरकारी विद्यालय में शिक्षिका हैं और दामाद बैंक में मैनेजर हैं। राजस्थान के जमींदार परिवार से आते हैं, यानि घर से भी संपन्न और प्रतिष्ठित हैं। लेकिन “गुरुजी” यानि श्री राजेश सिंह शेखावत, स्वभाव से इतने सहज और विनम्र हैं कि लोग उन्हें आदरवश “गुरुजी” कहने लगे।

वह कभी किसी बात पर क्रोधित नहीं होते, किसी से कोई शिकायत नहीं करते, न ही कभी किसी की निंदा करते हैं। चाहे देर तक ऑफिस में रुकना हो या छुट्टी के दिन आना पड़े, वे कभी कोई बहाना नहीं बनाते। अपने उच्च अधिकारियों से तो वह सम्मान से बात करते ही हैं, अधीनस्थ कर्मचारियों से भी हमेशा मधुर व्यवहार रखते हैं। उनकी सबसे दोस्ती है, किसी से भी बैर नहीं है। वे सचमुच अजातशत्रु हैं।

यह भी पढ़ें:  अखिल भारतीय क्षत्रिय समाज, कोन्नगर-मखला अंचल का वार्षिकोत्सव संपन्न

एक बार सचिवालय के किसी युवा कर्मचारी ने हँसते हुए उनसे पूछ लिया- “सर, आप तो क्षत्रिय हैं, इतने शांत और विनम्र कैसे रह लेते हैं?”
इस पर गुरुजी मुस्कराए और बोले-” जब समय की आवश्यकता थी,तब जिन्होंने शस्त्र उठाये, वह क्षत्रिय कहलाये। फिलहाल यह कार्य देश की सेना और पुलिस कर रही है। जो भी देश और समाज की रक्षा कर रहा है, वह क्षत्रिय है।

उनमें उग्रता होना आवश्यक है, उनके कार्य की जरूरत है। मैं लिखापढ़ी का कार्य कर रहा हूँ, इस कार्य में उग्रता की भला क्या आवश्यकता? इसलिए मैं शांत और विनम्र रहता हूँ। वैसे भी मैं भगवान कृष्ण का भक्त हूँ, वह सबसे प्यार करते थे, इसलिए उनका अनुयायी होने के नाते मैं भी सबसे स्नेह करता हूँ।”

“अच्छा, क्या आपने कभी शराब नहीं पी? नॉनवेज नहीं खाया?” उस युवा कर्मचारी ने जिज्ञासा व्यक्त की।

“मैं पहले सब करता था, पर अब छोड़ दिया है।” गुरुजी ने शांतचित्त होकर जवाब दिया।

यह भी पढ़ें:  हावड़ा : सामाजिक संस्था सारथी फाउंडेशन का भोजन वितरण का कार्यक्रम संपन्न

“कब से छोड़ दिया है सर?” उसकी जिज्ञासा बढ़ती जा रही थी
गुरुजी इस बार हल्का सा मुस्कराते हुए बोले-” जब तुम शायद जन्में भी नहीं थे, तब से मैंने इन चीजों का त्याग कर दिया। मैंने 18 वर्ष की उम्र के बाद इन चीज़ों को हाथ नहीं लगाया।”

यह सुनकर सब हैरान रह गए, क्योंकि जिस उम्र में लोग अमूमन इन व्यसनों की चपेट में आते हैं, उस समय तक गुरुजी इन सबसे मुक्ति पा चुके थे। इनकी बुराइयों को समझ चुके थे।

अगले साल, 23 अप्रैल 2025 को मैंने अपने विवाह की सिल्वर जुबली 25वीं वर्षगांठ – मनाई थी। तो उस शुभ अवसर पर गुरुजी बिलकुल एक सच्चे गुरु की तरह हम सभी को स्नेह और आशीर्वाद देने आए।

पद, प्रतिष्ठा, पैसा जैसे तमाम सांसारिक सुख होने के बावजूद गुरुजी को लेशमात्र का भी अहम नहीं है, घमंड उन्हें छू तक नहीं गया है। तमाम साधु, संत, कथावाचक इस मायावी संसार में जिस निर्लिप्त और सादगीपूर्ण जीवन का बखान करते नहीं थकते, ‘गुरुजी’ उसका प्रत्यक्ष, सशरीर उदाहरण हैं।

#गुरुपूर्णिमा

(विनय सिंह बैस)
“गुरुजी” के शिष्य

ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे कोलकाता हिन्दी न्यूज चैनल पेज को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। एक्स (ट्विटर) पर @hindi_kolkata नाम से सर्च करफॉलो करें।

Vinay Singh Vais Avatar
यह भी पढ़ें:  बेलदा : बाल संरक्षण एवं बाल विवाह रोकथाम पर संगोष्ठी का आयोजन
Fact Checked & Editorial Guidelines

Our Fact Checking Process

We prioritize accuracy and integrity in our content. Here's how we maintain high standards:

  1. Expert Review: All articles are reviewed by subject matter experts.
  2. Source Validation: Information is backed by credible, up-to-date sources.
  3. Transparency: We clearly cite references and disclose potential conflicts.
Reviewed by: Subject Matter Experts

Our Review Board

Our content is carefully reviewed by experienced professionals to ensure accuracy and relevance.

  • Qualified Experts: Each article is assessed by specialists with field-specific knowledge.
  • Up-to-date Insights: We incorporate the latest research, trends, and standards.
  • Commitment to Quality: Reviewers ensure clarity, correctness, and completeness.

Look for the expert-reviewed label to read content you can trust.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

three + eleven =