खड़गपुर। अभिनय सम्राट दिलीप कुमार को तीन फिल्मों में काम न करने का अफसोस हमेशा रहा। जी हां, अभिनय सम्राट और ट्रेजेडी किंग जैसे खिताब से नवाजे जाने वाले दिलीप कुमार ने अपने फिल्मी सफर में तीन फिल्मों में काम न करने का, उन उत्कृष्ट फिल्मों का हिस्सा न बन पाने का अफसोस हमेशा रहा। जिसे उन्होने विभिन्न साक्षात्कारों में भी कबूल किया है।
उनमें सबसे पहली फिल्म का नाम है ‘बैजू बावरा’ जो सन 1952 में प्रदर्शित हुई थी और जिसके नायक थे भारत भूषण। दूसरी फिल्म फिल्म ‘प्यासा’ थी। निर्माता निर्देशक अभिनेता गुरुदत्त की यह फिल्म सन् 1957 में प्रदर्शित हुई थी। दिलीप कुमार के इस फिल्म मे काम न करने की वजह से स्वयं गुरुदत्त ने मुख्य भूमिका बेहद सफलता पूर्वक निभाई थी।
उल्लेखनीय है कि “प्यासा” का ज़िक्र अमरीका की विश्व प्रसिद्ध साप्ताहिक पत्रिका “टाइम” के वर्ष 2005 के विशेष अंक “All-TIME 100 Movies” में किया गया था।

तीसरी फिल्म का नाम ‘जंजीर’ है यही वह फिल्म है जिसने अमिताभ को “The अमिताभ” बनाया। जैसा कि सभी जानते हैं, कि जंजीर ही वह फिल्म है जिसने अमिताभ को फिल्मी दुनिया में स्थापित किया और फिल्मी धारा को नया मोड़ भी दिया। इसके बाद अमिताभ ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
तो साथियों यह था आज का दिलचस्प किस्सा। हो सकता है इसमें से कई बातें आप जानते होंगे… फिर भी आपने मेरे इस लेख को पढ़ा इसके लिए आपका धन्यवाद, शुक्रिया और आभार…। आज तो यही तक, फिर आऊंगा इसी तरह अतीत के रोचक, मीठे और दिलचस्प फिल्मी किस्से लेकर…

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