आद्यापीठ में स्थापना दिवस की धूम
कोलकाता। श्रावण मास की शीतल फुहार और लोकगीतों की मधुर गूंज के बीच दक्षिणेश्वर के आद्यापीठ में सखी बहिनपा मैथिलानी समूह, कोलकाता इकाई का “स्थापना दिवस” कार्यक्रम उल्लास के साथ संपन्न हुआ। प्रकृति के सौंदर्य और मैथिल संस्कृति के रंगों से सजा यह आयोजन सखियों के लिए आपसी प्रेम और भाईचारे का प्रतीक बन गया।
विद्यापति की रचना से हुआ शुभारंभ –
कार्यक्रम की अध्यक्षता समूह की अध्यक्ष नीलम झा ने की। कार्यक्रम का शुभारंभ कवि कोकिल महाकवि विद्यापति की कालजयी रचना “जय जय भैरवि असुर भयाओन” की सामूहिक प्रस्तुति से किया गया। जिसका नेतृत्व पूनम दास ने किया। इसके साथ ही दीप प्रज्वलन और माँ भगवती की वंदना कर श्रावण के आगमन का स्वागत किया गया।
कजरी, नृत्य और हँसी-ठहाकों से सराबोर रहा माहौल उमंग में डूबी सखियों ने एक से बढ़कर एक कजरी गीत प्रस्तुत किए। सावन के झूलों, पिया के इंतजार और हरियाली के गीतों पर सखियों ने सामूहिक नृत्य कर सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के दौरान सखियों के हँसी-ठहाके और लोक परंपराओं की चर्चा ने पूरे हॉल को घर जैसा आत्मीय बना दिया।
सखियों ने पारंपरिक लाल रंग की साड़ियों और श्रावणी श्रृंगार में सज-धज कर वातावरण को और भी रम्य बना दिया। हरियाली का प्रतीक हरा रंग धरती पर प्राण फूंकने वाले सावन के सम्मान में धारण किया गया था। सखियों ने अपने मधुर गीतों एवं सामूहिक नृत्य की प्रस्तुति दी। सभी की प्रस्तुतियों को उपस्थित लोगों ने खूब सराहा।
स्थापना दिवस का उद्देश्य केवल उत्सव नहीं, बल्कि पिछले कार्यो का लेखा-जोखा तथा आने वाले समय में सामूहिक उत्थान पर योजनाएँ प्रस्तुत की जाती है। प्रवासी मैथिल महिलाओं को अपनी जड़ों से जोड़ना और एक-दूसरे को सहयोग का मंच देना है।
उल्लेखनीय है कि इस संस्था की स्थापना ग्यारह वर्ष पहले आरती झा द्वारा हुई थी। आज यह देश-विदेश में फैल चुकी है। मैथिली भाषा का संरक्षण संवर्धन, संस्कृति का रक्षण पोषण इसका प्रमुख उदेश्य है। कार्यक्रम के अंत में सामूहिक भोज और धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे कोलकाता हिन्दी न्यूज चैनल पेज को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। एक्स (ट्विटर) पर @hindi_kolkata नाम से सर्च कर, फॉलो करें।

