अनिल बेदाग, मुंबई | 25 मार्च 2026: मुंबई में न्यूरो चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए फोर्टिस हेल्थकेयर ने न्यूनतम आक्रमक मस्तिष्क एवं रीढ़ सर्जरी संस्थान (Minimal Invasive Brain & Spine Surgery Institute) का औपचारिक उद्घाटन किया।
यह संस्थान पहले वार्षिक न्यूरोसाइंसेज कॉन्क्लेव के दौरान शुरू किया गया, जिसमें देशभर के प्रमुख न्यूरोलॉजिस्ट और न्यूरोसर्जन शामिल हुए।
इस अत्याधुनिक संस्थान का नेतृत्व डॉ. जयेश सरधारा कर रहे हैं, जो न्यूनतम आक्रमक (मिनिमली इनवेसिव) तकनीकों के जरिए जटिल मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी से संबंधित विकारों के उपचार को नई दिशा देने का लक्ष्य रखते हैं।
कॉन्क्लेव का मुख्य विषय “एडवांस्ड न्यूरोसाइंसेज पर वर्तमान अपडेट” रहा, जिसमें स्ट्रोक मैनेजमेंट, न्यूरो-ऑन्कोलॉजी, न्यूरो-क्रिटिकल केयर, मिनिमली इनवेसिव स्पाइन सर्जरी और ब्रेन ट्यूमर मैनेजमेंट जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।
डॉ. जयेश सरधारा ने उद्घाटन के अवसर पर कहा: “न्यूनतम आक्रमक न्यूरोसर्जरी भविष्य की दिशा है। इसमें सटीकता और आधुनिक तकनीक मरीजों को तेज रिकवरी और बेहतर परिणाम देती है। इस संस्थान के माध्यम से हम जटिल न्यूरोलॉजिकल और स्पाइन समस्याओं का उपचार और अधिक सुरक्षित तथा प्रभावी तरीके से करना चाहते हैं।”
डॉ. विशाल बेरी ने इस पहल को चिकित्सा उत्कृष्टता और सहयोगात्मक सीख का मजबूत मंच बताते हुए कहा: “ऐसे कॉन्क्लेव से विशेषज्ञों के बीच ज्ञान का आदान-प्रदान होता है, जो सीधे मरीजों की बेहतर देखभाल में मदद करता है।”
डॉ. एस. नारायणी ने भी इस आयोजन को नवाचार और ज्ञान साझाकरण को बढ़ावा देने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया।
संस्थान का उद्देश्य
यह नया संस्थान फोर्टिस हेल्थकेयर की न्यूरोसाइंस देखभाल को और मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यहां न्यूनतम आक्रमक तकनीकों का उपयोग करके मरीजों को कम दर्द, कम अस्पताल में रहने का समय और तेज रिकवरी मिल सकेगी। संस्थान में आधुनिक ऑपरेशन थिएटर, एडवांस्ड इमेजिंग सिस्टम और मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम काम करेगी।
कॉन्क्लेव की विशेषता
दो दिवसीय सम्मेलन में देशभर के प्रमुख विशेषज्ञों ने न केवल अपने अनुभव साझा किए, बल्कि भविष्य की न्यूरोसर्जरी पर भी चर्चा की। इस मंच ने युवा डॉक्टरों और छात्रों को भी सीखने का अच्छा अवसर प्रदान किया।
फोर्टिस हेल्थकेयर के इस कदम से मुंबई में न्यूरो चिकित्सा सुविधाओं को नई ऊंचाई मिलने की उम्मीद है। यह पहल न केवल मरीजों के लिए बेहतर उपचार सुनिश्चित करेगी, बल्कि भारत में न्यूरोसाइंस के क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने में भी योगदान देगी।
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