बिजनेस डेस्क, कोलकाता | 13 जुलाई 2026: भारत का खनन और धातु (माइनिंग एंड मेटल्स) क्षेत्र वैश्विक स्तर पर अपनी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मजबूत कर सकता है, बशर्ते लॉजिस्टिक्स को केवल परिवहन नहीं बल्कि रणनीतिक आधार के रूप में देखा जाए।
FICCI के ‘Enhancing Competitiveness of Mining and Metals’ सम्मेलन में विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि भारत में माल ढुलाई की लागत कई देशों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी है, लेकिन बिखरा हुआ मल्टीमॉडल नेटवर्क, खदानों तक कमजोर कनेक्टिविटी और सड़क परिवहन पर अत्यधिक निर्भरता उद्योग की गति धीमी कर रही है।
सम्मेलन में आधुनिक तकनीक, समर्पित फ्रेट कॉरिडोर और डिजिटल समाधान अपनाने पर विशेष जोर दिया गया।
डॉ. वी.के. सारस्वत का महत्वपूर्ण सुझाव
पूर्व नीति आयोग सदस्य डॉ. वी.के. सारस्वत ने कहा: “लॉजिस्टिक्स को माइनिंग और मेटल्स सेक्टर की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता का रणनीतिक निर्धारक माना जाना चाहिए।”
उन्होंने खदानों तक पहले और अंतिम मील की कनेक्टिविटी, सड़क परिवहन पर अत्यधिक निर्भरता और खनिज ढुलाई की चुनौतियों का जिक्र करते हुए 10 सूत्रीय राष्ट्रीय रणनीति का सुझाव दिया। इसमें शामिल प्रमुख सुझाव हैं:
- समर्पित मिनरल फ्रेट कॉरिडोर
- कन्वेयर सिस्टम और स्लरी पाइपलाइन
- पोर्ट मैकेनाइजेशन
- डिजिटलाइजेशन
FICCI-डेलॉइट रिपोर्ट की मुख्य बातें
FICCI-डेलॉइट की संयुक्त रिपोर्ट के अनुसार, भारत की फ्रेट टैरिफ वैश्विक मानकों के अनुरूप है, लेकिन बिखरा हुआ लॉजिस्टिक्स नेटवर्क इसकी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त को कम कर रहा है।
रेलवे बोर्ड के अतिरिक्त सदस्य (ट्रैफिक) देवेंद्र कुमार ने बताया कि रेलवे एंड-टू-एंड लॉजिस्टिक्स सेवाओं का विस्तार कर रहा है और भविष्य में दो किलोमीटर लंबी मालगाड़ियां भी भारतीय ट्रैक पर दौड़ सकती हैं।
2047 के लक्ष्य के लिए जरूरी
सम्मेलन में रेखांकित किया गया कि 2047 के विकसित भारत लक्ष्य को हासिल करने के लिए माल ढुलाई क्षमता में कई गुना वृद्धि और आधुनिक, टिकाऊ लॉजिस्टिक्स अवसंरचना का निर्माण अनिवार्य होगा।
निष्कर्ष: खनन और धातु क्षेत्र भारत की आर्थिक प्रगति का महत्वपूर्ण स्तंभ है। यदि लॉजिस्टिक्स को रणनीतिक प्राथमिकता दी गई तो यह क्षेत्र न सिर्फ घरेलू जरूरतें पूरी करेगा बल्कि वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति को और मजबूत बनाएगा।
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