कोलकाता न्यूज डेस्क | 21 मई 2026: पश्चिम बंगाल के फलता विधानसभा उपचुनाव में गुरुवार को मतदान के दौरान राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदली हुई नजर आई। जिस तृणमूल कांग्रेस (TMC) पर पिछले चुनावों में विपक्षी एजेंटों को बूथों से दूर रखने के आरोप लगते रहे,
उसी पार्टी के एजेंट इस बार अधिकांश बूथों से गायब दिखे। दूसरी ओर भाजपा उम्मीदवार देवांशु पांडा पूरे आत्मविश्वास में नजर आए। इलाके में घूमते हुए उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ चुनावी माहौल का आनंद लिया।
फलता सीट पर तृणमूल उम्मीदवार बनने वाले ‘पुष्पा’ के नाम से चर्चित जहांगिर खान (Jahangir Khan) के आखिरी समय में चुनाव मैदान से हटने के बाद मुकाबला लगभग एकतरफा माना जा रहा है। भाजपा नेताओं का दावा है कि जनता अब खुलकर मतदान कर रही है और इलाके में डर का माहौल खत्म हो चुका है।
दिलीप घोष का जाहांगिर खान पर तंज
राज्य के मंत्री दिलीप घोष (Dilip Ghosh) ने तृणमूल पर निशाना साधते हुए कहा, “बहुत सुनते थे कि वह बड़ा धुरंधर है! अब कहां गया? पुलिस के बिना लड़ने के लिए हिम्मत चाहिए।”
उन्होंने दावा किया कि भाजपा ने बिना प्रशासनिक मदद के जनता के बीच लड़ाई लड़ी और जीत हासिल की। दिलीप घोष का बयान सीधे तौर पर जाहांगिर खान पर हमला माना जा रहा है।
बूथों पर BJP एजेंट मौजूद, TMC नदारद
फलता विधानसभा क्षेत्र के 285 बूथों में भाजपा एजेंटों की सक्रिय मौजूदगी देखी गई। वहीं अधिकांश बूथों पर तृणমূল एजेंट नहीं दिखे। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस बार मतदान का माहौल अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण और उत्सव जैसा है।
भाजपा उम्मीदवार Debangshu Panda सुबह से इलाके में घूमते नजर आए। कार्यकर्ताओं के साथ घुगनी-मुड़ी खाते हुए उन्होंने कहा कि जनता बदलाव चाहती है और परिणाम भाजपा के पक्ष में जाएगा।
‘पुष्पा’ क्यों हटे पीछे?
गौरतलब है कि अप्रैल में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान जাহांगिर खान काफी आक्रामक अंदाज में प्रचार करते दिखे थे। उस समय पुलिस अधिकारी अजयपाल शर्मा के साथ उनकी बयानबाजी भी चर्चा में रही थी। लेकिन भाजपा सरकार बनने के बाद उनकी सक्रियता अचानक कम हो गई।
कुछ दिन पहले मीडिया से बातचीत में जাহांगिर खान ने पुनर्निर्वाचन से हटने की घोषणा कर दी थी। इसके बाद से तृणমূল कार्यकर्ताओं का मनोबल भी कमजोर पड़ा दिखाई दे रहा है।
फलता सीट पर कितने मतदाता?
फलता विधानसभा क्षेत्र में कुल 2,36,444 मतदाता हैं। इनमें:
- पुरुष मतदाता: 1,21,300
- महिला मतदाता: 1,15,135
- तृतीय लिंग मतदाता: 9
चुनाव आयोग की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं और मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण बताई जा रही है।
बंगाल की राजनीति में बड़ा संकेत?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि फलता उपचुनाव की तस्वीर बंगाल की बदलती राजनीति का संकेत हो सकती है। तृणমূল की संगठनात्मक कमजोरी और भाजपा की आक्रामक मौजूदगी आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति को नई दिशा दे सकती है।
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