Exclusive News : शव दाह कर चर्चा में आई गौरी अम्मा को मिली गुमनाम मौत !! 

तारकेश कुमार ओझा, खड़गपुर : जिंदा थी तो खूब चर्चे  थे , आखिरी पल में  मिली गुमनाम मौत । महिला होकर भी श्मशान में  शव दाह कर चर्चा में आई गौरी अम्मा की कुछ ऐसी ही कहानी है । जीवन का लंबा सफर तय कर  गौरी अम्मा इस संसार को अलविदा कह गई , लेकिन अंतिम समय में उसे वो सम्मान नहीं मिला , जिसकी वो हकदार थी ।
बता दें कि खड़गपुर बस स्टैंड के  नजदीक स्थित हरिश्चंद्र श्मशान घाट में  रह कर गौरी अम्मा कई सालों से शव दाह जैसा कार्य कर रही थी। शायद वो देश की अकेली महिला थी, जो यह कार्य करती थी।
इसके चलते उसे राष्ट्रीय स्तर पर काफी  ख्याति मिली थी। देश के कई नामी समाचार पत्र व पत्रिकाओं में उसकी स्टोरी छपने से गरीबी में भी वो एक सेलिब्रिटी बन गई थी। शासकीय अधिकारी से लेकर राजनेता तक लगातार उसके संपर्क में रहते थे । बताते हैं कि उन्हें कई आश्वासन भी मिले थे , हालांकि अंतिम समय तक उनके जीवन में कोई बड़ा बदलाव नजर नहीं आया ।   कई साल पहले उनसे श्ममान घाट में  मेरी मुलाकात हुई थी गौरी अम्मा ने बताया कि वो जब ब्याह कर ससुराल आई तो उनके ससुर शव दाह किया करते थे। ससुर के  निधन के  बाद पति ने यह पेशा अपनाया और पति के आकस्मिक निधन के बाद उन्हें यह पेशा अपनाना पड़ा ।
गौरी अम्मा अचानक बीमार पड़ी और अस्पताल में  इलाज के  दौरान उसकी मौत हो गई। हालांकि अंतिम समय में  अधिवक्ता अरूप वर्मा, समाजसेवी अमिताभ दासगुप्ता तथा पूर्व सभासद मधु कामी जैसे गिने – चुने लोग ही उन्हें अंतिम विदाई देने वालों में  नजर आए । जीते जी जो महिला अपनी शख्सियत के  चलते चर्चित थी, वो गुमनामी में  ही चली गई । स्थानीय समाजसेवी अमिताभ दासगुप्ता ने कहा कि उसी हरिश्चंद्र श्मशान घाट में  गौरी अम्मा का अंतिम संस्कार हुआ जहां वो अधिकांश समय रही । जीते जी वो बता गई थी कि श्मशान के  किस स्थान पर उसका अंतिम संस्कार होगा ।
Shrestha Sharad Samman Awards

2 COMMENTS

  1. वाकई महिला होकर शव दाह सरीखा जीवट कार्य करने वाली गौरी अम्मा अधिक सम्मानजनक अंतिम विदाई की हकदार थी । हरिश्चंद्र श्मशान घाट या शहर के किसी अन्य स्थान पर गौरी अम्मा की प्रतिमा स्थापित की जानी चाहिए। एक्सक्लूसिव न्यूज के लिए कोलकाता हिंदी न्यूज बधाई की पात्र है ।
    Dipak Kumar Dasgupta(Dipu bhai).Social activist,Kharagpur.

  2. यह खबर तो मुझे पता ही नहीं चला आपके माध्यम से यह पता चला ।।
    आपका बहुत धन्यवाद और आभार ।।
    अम्मा का अंतिम सफर यादगार होना था , दुख है दुनिया राजनैतिक चमक धमक में खो गई है ।।

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