कोलकाता, 1 जनवरी 2026: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर दो बुजुर्गों की दुखद मौतों के बाद दर्ज शिकायतों पर चुनाव आयोग ने कड़ी आपत्ति जताई है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) कार्यालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर इन शिकायतों को पूर्वनियोजित, निराधार और सुनियोजित साजिश करार दिया है।
आयोग ने आरोप लगाया कि ये शिकायतें कानूनी कर्तव्यों का पालन कर रहे अधिकारियों को डराने-धमकाने और चुनावी प्रक्रिया को बाधित करने का जानबूझकर किया गया प्रयास हैं।

चुनाव आयोग का बयान
- शिकायतें निराधार: CEC ज्ञानेश कुमार और राज्य CEO मनोज अग्रवाल पर दर्ज FIR और शिकायतों को “बाहरी दबाव” का हिस्सा बताया।
- साजिश का आरोप: बयान में कहा गया, “ये संगठित और सुनियोजित शिकायतें चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की रणनीति हैं। ऐसे प्रयास सफल नहीं होंगे।”
- कानूनी सुरक्षा: आयोग ने दोहराया कि मुख्य चुनाव आयुक्त और निर्वाचन अधिकारी अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए किसी आपराधिक अपराध के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराए जा सकते। इसलिए ऐसी FIR का कानूनी औचित्य नहीं है।
- जांच की बात: आयोग ने कहा कि इन शिकायतों के पीछे की साजिश का पर्दाफाश करने के लिए हर संभव उपाय किए जाएंगे।
घटना की पृष्ठभूमि
- दो बुजुर्गों (पुरुलिया में 82 वर्षीय दुर्जन माझी और हावड़ा में 64 वर्षीय जमाल अली शेख) की मौतें SIR नोटिस मिलने के बाद हुईं।
- परिवारों ने CEC और CEO पर मानसिक उत्पीड़न और दबाव का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज कराई।
- TMC ने इसे “आयोग की नीतियों की वजह से मौत” बताया और दिल्ली में प्रतिनिधिमंडल भेजने की तैयारी की।
TMC vs आयोग – टकराव जारी
TMC ने आयोग के बयान को “अहंकार” बताया। अभिषेक बनर्जी ने कहा: “आयोग अब साजिश का रोना रो रहा है। बुजुर्गों की मौतें आयोग की नीतियों का परिणाम हैं। हम सच्चाई सामने लाएंगे।”
भाजपा ने आयोग का समर्थन किया। सुकांत मजूमदार ने कहा: “आयोग सही कर रहा है। TMC फर्जी वोटर बचाने के लिए साजिश रच रही है।”
यह विवाद अब कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर तेज हो गया है। SIR प्रक्रिया 5 जनवरी तक चलेगी और फाइनल लिस्ट 14 फरवरी को आएगी।
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