खड़गपुर ब्यूरो | 31 जुलाई 2026: सतत एवं टिकाऊ विकास परियोजनाओं के निर्माण में पर्यावरणीय अध्ययन और संभावित प्रभावों के वैज्ञानिक विश्लेषण की महत्ता को रेखांकित करते हुए एकदिवसीय राज्यस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
ट्रॉपिकल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्थ एंड एनवायरनमेंटल रिसर्च की पहल पर यह कार्यशाला मेदिनीपुर स्थित राजा नरेंद्रलाल महिला महाविद्यालय तथा झाड़ग्राम के कापगढ़ी स्थित सेवा भारती महाविद्यालय के भूगोल विभाग के सहयोग से राजा नरेंद्रलाल महिला महाविद्यालय के डॉ. बी. सी. राय मेमोरियल सभागार में आयोजित की गई।
कार्यशाला का उद्देश्य
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, सर्वेक्षणकर्ताओं, नीति-निर्माताओं और आम नागरिकों के बीच पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) की आवश्यकता और उपयोगिता के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
मुख्य अतिथि और विशिष्ट उपस्थिति
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं मुख्य वक्ता के रूप में विद्यासागर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. डॉ. सुशांत चक्रवर्ती उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में मेदिनीपुर रामकृष्ण मिशन विद्याभवन के प्रधानाचार्य महाराज स्वामी दिव्यनिष्ठानंदजी महाराज शामिल हुए।
कार्यक्रम की मुख्य सलाहकार राजा नरेंद्रलाल महिला महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. स्वप्ना घोड़ाई थीं। अतिथि वक्ता के रूप में झाड़ग्राम के रानी इंदिरा देवी महिला महाविद्यालय के पूर्व प्रभारी प्राचार्य प्रो. सुशील कुमार बर्मन उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. विनय कुमार चंद ने की। आयोजन सचिव प्रो. डॉ. प्रणव साहू तथा संयोजक प्रो. डॉ. प्रभात कुमार शीट थे। इस अवसर पर प्राचार्य पीयूष कांति त्रिपाठी और प्रो. शुभंकर पात्र भी मौजूद रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत
कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे मातरम् की सामूहिक प्रस्तुति तथा पौधों में जल अर्पित कर किया गया। राजा नरेंद्रलाल महिला महाविद्यालय के संगीत विभाग के विद्यार्थियों ने उद्घाटन गीत प्रस्तुत किया।
वक्ताओं के प्रमुख विचार
प्रारंभिक वक्तव्य में सेवा भारती महाविद्यालय के भूगोल विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रणव साहू ने कहा कि किसी भी नई परियोजना के निर्माण से पहले उसके पर्यावरण, समाज और अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों का वैज्ञानिक अध्ययन अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने बताया कि हाल ही में झाड़ग्राम जिले के बेलपहाड़ी स्थित खांदारानी झील में संभावित लेक टूरिज्म परियोजना को लेकर भी एक विस्तृत EIA रिपोर्ट तैयार की गई है।
मुख्य वक्ता प्रो. डॉ. सुशांत चक्रवर्ती ने कहा कि उद्योग, कृषि, सड़क निर्माण और शैक्षणिक संस्थानों जैसी विकास परियोजनाओं के लिए पर्यावरणीय प्रभावों का समुचित अध्ययन जरूरी है। उन्होंने विद्यार्थियों में इस विषय की समझ विकसित करने को समय की मांग बताया।
प्रो. सुशील कुमार बर्मन ने कहा कि झाड़ग्राम और जंगलमहल क्षेत्र की जनजातीय संस्कृति तथा सामाजिक परंपराएं प्राकृतिक पर्यावरण से गहराई से जुड़ी हुई हैं। यहां वृक्ष संरक्षण की परंपरा आज भी जीवित है।
सम्मान और पुरस्कार
कार्यक्रम के समापन पर ट्रॉपिकल इंस्टीट्यूट ऑफ अर्थ एंड एनवायरनमेंटल रिसर्च की ओर से सामाजिक सेवा, वैज्ञानिक चिंतन तथा पर्यावरण संरक्षण में विशेष योगदान के लिए विभिन्न स्मृति पुरस्कार प्रदान किए गए।
सामाजिक सेवा के क्षेत्र में शिक्षक सुदीप खांड़ा, भू-पर्यावरण विज्ञान के क्षेत्र में डॉ. माफिजुल हक तथा पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में डॉ. प्रभात कुमार शीट को सम्मानित किया गया। डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त करने पर डॉ. विक्रमादित्य मल्लदेव को विशेष सम्मान दिया गया।
प्रतिभागिता और समापन
कार्यशाला में तीनों संस्थानों के लगभग 110 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिनमें करीब 60 छात्र-छात्राएं शामिल थीं।
अध्यक्ष डॉ. विनय कुमार चंद ने कहा कि पर्यावरणीय सर्वेक्षण केवल भूगोल के शोधकर्ताओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इंजीनियरों, कृषि विशेषज्ञों और विज्ञान की अन्य शाखाओं के शोधकर्ताओं को भी इसमें सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए।
अंत में संस्था के सह-संपादक डॉ. चंदन करण ने धन्यवाद ज्ञापन किया। राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
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