कोलकाता, 2 जनवरी 2026: पश्चिम बंगाल के पूर्वी मिदनापुर जिले में राजनीतिक हिंसा का एक और गंभीर मामला सामने आया है। मोयना विधानसभा क्षेत्र के सुडामपुर गांव के रहने वाले भाजपा नेता सुब्रत अधिकारी (उम्र 33 वर्ष) का शव पांच दिनों बाद एक स्थानीय तालाब से बरामद हुआ है।
परिवार और स्थानीय भाजपा नेताओं ने इसे सुनियोजित राजनीतिक हत्या बताते हुए सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस से जुड़े स्थानीय गुंडों पर सीधा आरोप लगाया है।
शव मिलने की खबर फैलते ही इलाके में तनाव बढ़ गया और भाजपा कार्यकर्ताओं ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।

घटना की पूरी कहानी
सुब्रत अधिकारी भाजपा के एक सक्रिय कार्यकर्ता थे और मोयना इलाके में पार्टी की गतिविधियों में काफी मुखर थे। उनके परिवार के अनुसार, वे 28 दिसंबर की शाम को पास के एक इलाके में भगवान बजरंगबली की पूजा में शामिल होने के लिए घर से निकले थे।
उस रात वे घर नहीं लौटे। परिवार ने तुरंत पुलिस में लापता होने की शिकायत दर्ज कराई, लेकिन पांच दिनों तक कोई सुराग नहीं मिला। आज सुबह जब ग्रामीणों ने तालाब में शव तैरता देखा तो पुलिस को सूचना दी गई।
शव की पहचान सुब्रत अधिकारी के रूप में हुई। शव की हालत और परिस्थितियां देखकर हत्या का शक गहरा गया है। मृतक का मोबाइल फोन भी गायब है।
परिवार और भाजपा नेताओं के आरोप
मृतक की मां काजल देवी ने मीडिया से बात करते हुए आंसुओं के साथ कहा कि उनका बेटा पूजा के लिए गया था और कहा था कि जल्दी वापस आएगा, लेकिन वह कभी लौटा ही नहीं।
शव की हालत देखकर दिल बैठ गया। साफ है कि उसकी हत्या की गई है। वे पुलिस और सरकार से निष्पक्ष जांच की मांग कर रही हैं।
स्थानीय भाजपा नेता सुजीत बेरा ने परिवार की बात को दोहराते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सुब्रत का किसी से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं थी।
शव की हालत देखकर लगता है कि हत्या कहीं और की गई और फिर लोगों व पुलिस को गुमराह करने के लिए शव को तालाब में फेंक दिया गया। बेरा ने आगे खुलासा किया कि पहले भी सुब्रत को अगवा किया गया था।
उसे महिषादल ले जाकर तृणमूल कांग्रेस से जुड़े कुछ स्थानीय गुंडों ने बुरी तरह पीटा था। 2026 के विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही TMC कार्यकर्ता भाजपा समर्थकों को डराने-धमकाने की कोशिश कर रहे हैं और पुलिस मूक दर्शक बनी हुई है।
पुलिस और राजनीतिक प्रतिक्रिया
पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। पूर्वी मिदनापुर पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सभी पहलुओं से जांच की जा रही है और जल्द ही स्पष्टता आएगी।
भाजपा ने इस घटना की CBI जांच की मांग की है और कहा है कि राज्य पुलिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
तृणमूल कांग्रेस ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि यह व्यक्तिगत विवाद या अन्य कारणों से हुई घटना हो सकती है और इसे राजनीतिक रंग देना गलत है।
2026 विधानसभा चुनाव से महज कुछ महीने पहले बंगाल में राजनीतिक हिंसा के इस तरह के आरोप राज्य की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं।
परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है और भाजपा ने बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है। मामले की जांच पर सबकी नजरें टिकी हैं।
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