तारकेश कुमार ओझा, खड़गपुर। विज्ञान की दुनिया में देश का नाम रोशन करने वाले दुर्गापुर के छात्र सौमिक मंडल ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर शानदार उपलब्धि दर्ज की है। कक्षा 12 के छात्र सौमिक ने इटली के तुरीन में आयोजित 19वें इंटरनेशनल अर्थ साइंस ओलंपियाड (IESO) में दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
दुनिया के अलग-अलग देशों से पहुंचे प्रतिभाशाली युवा भू-विज्ञान विद्यार्थियों के बीच सौमिक का प्रदर्शन न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि भारत के लिए भी गौरव का विषय है। खास बात यह रही कि व्यक्तिगत लिखित और प्रायोगिक परीक्षा में स्वर्ण पदक हासिल करने के साथ उन्होंने विश्व स्तर पर तीसरा सर्वश्रेष्ठ व्यक्तिगत स्कोर भी दर्ज किया।
18 हजार प्रतिभागियों से शुरू हुआ सफर :-
सौमिक की अंतरराष्ट्रीय यात्रा आसान नहीं थी। करीब 18 हजार प्रतिभागियों के बीच आयोजित प्रारंभिक राष्ट्रीय चयन परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने देशभर में 11वां स्थान हासिल किया। इसके बाद उनका चयन वडोदरा स्थित एम.एस. विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय ओरिएंटेशन कैंप के लिए हुआ।
कैंप में प्रशिक्षण और विभिन्न चरणों की कठिन प्रतिस्पर्धा के बाद सौमिक ने दूसरा स्थान हासिल किया। इस प्रदर्शन के आधार पर उन्हें चार सदस्यीय टीम इंडिया में जगह मिली और इटली में आयोजित IESO में भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला।
व्यक्तिगत परीक्षा में दुनिया के तीसरे सर्वश्रेष्ठ :-
तुरीन में आयोजित मुख्य प्रतियोगिता में सौमिक ने कठिन लिखित और प्रायोगिक परीक्षाओं में शानदार प्रदर्शन किया। इसके परिणामस्वरूप उन्हें व्यक्तिगत वर्ग में स्वर्ण पदक मिला। उनका प्रदर्शन यहीं नहीं रुका। उन्होंने व्यक्तिगत स्पर्धा में विश्व का तीसरा सर्वोच्च स्कोर हासिल किया।
IESO में भारत की 19 वर्षों की भागीदारी के इतिहास में सौमिक के इस प्रदर्शन को एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
टीम स्पर्धा में भी सोना :-
व्यक्तिगत सफलता के बाद सौमिक ने अंतरराष्ट्रीय टीम फील्ड इन्वेस्टिगेशन (ITFI) में भी अपनी क्षमता साबित की। विभिन्न देशों के पांच अन्य प्रतिभागियों के साथ टीम बनाकर उन्हें मैदान में दिए गए जटिल भू-विज्ञान संबंधी सवालों का समाधान करना था। सौमिक की टीम ने शानदार प्रदर्शन किया और उन्होंने इस स्पर्धा में भी स्वर्ण पदक अपने नाम किया।
इसके अलावा अर्थ सिस्टम प्रोजेक्ट (ESP) में सौमिक ने रजत पदक हासिल किया। इस तरह इटली की प्रतियोगिता से वह दो स्वर्ण और एक रजत पदक लेकर लौटे।
केंद्रीय मंत्री ने किया सम्मानित :-
भारत लौटने के बाद सौमिक की उपलब्धि को राष्ट्रीय स्तर पर भी सम्मान मिला। नई दिल्ली स्थित पृथ्वी भवन में केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने उन्हें सम्मानित किया। स्कूल लौटने पर विद्यालय प्रबंधन, शिक्षक-शिक्षिकाओं और सहपाठियों ने भी सौमिक की इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए उन्हें बधाई दी।
कठिन प्रशिक्षण ने आत्मविश्वास बढ़ाया :-
अपनी उपलब्धि को याद करते हुए सौमिक ने बताया कि उनकी अंतरराष्ट्रीय यात्रा डीएवी मॉडल स्कूल से प्रारंभिक परीक्षा के माध्यम से शुरू हुई। करीब 18 हजार अभ्यर्थियों के बीच चयनित होकर उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर 11वां स्थान हासिल किया। इसके बाद वडोदरा में आयोजित राष्ट्रीय ओरिएंटेशन कैंप में कठोर प्रशिक्षण मिला। कैंप में दूसरा स्थान प्राप्त करने के बाद उन्हें टीम इंडिया में शामिल किया गया।
सौमिक के मुताबिक, तुरीन में व्यक्तिगत लिखित और प्रायोगिक परीक्षा में स्वर्ण पदक मिलने के अलावा व्यक्तिगत वर्ग में विश्व का तीसरा सर्वोच्च स्कोर हासिल करना उनके लिए विशेष अनुभव रहा। ITFI में विभिन्न देशों के विद्यार्थियों के साथ टीम के रूप में काम करते हुए स्वर्ण और ESP में रजत पदक हासिल करना भी उनके लिए यादगार रहा।
विज्ञान के क्षेत्र में नई उम्मीद :-
दुर्गापुर के इस युवा छात्र की उपलब्धि ने एक बार फिर साबित किया है कि छोटे शहरों से निकलने वाली प्रतिभाएं भी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी मजबूत पहचान बना सकती हैं।
सौमिक की सफलता परिवार और विद्यालय के लिए गर्व का विषय होने के साथ-साथ विज्ञान एवं भू-विज्ञान के क्षेत्र में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों के लिए भी प्रेरणादायक है। शिक्षकों और शुभचिंतकों को उम्मीद है कि उसकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ी के विद्यार्थियों को विज्ञान की ओर और अधिक आकर्षित करेगी।
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