दुर्गापुर। दुर्गापुर हिंदी भाषा मंच की ओर से हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती के उपलक्ष्य में स्कूली बच्चों के लिए लिखित त्वरित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। वैश्विक साहित्य जगत में अपनी विशिष्ट पहचान के साथ स्थापित हिंदी के अप्रतिम साहित्यकार प्रेमचंद जी की जीवनी, भारतीय साहित्य में उनका अवदान और उनकी कहानियों और उपन्यासों के आधार पर बृहत्तर दुर्गापुर अंचल में स्थित विद्यालयों के छात्र छात्राओं के लिए दुर्गापुर हिंदी भाषा मंच द्वारा लिखित त्वरित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन दिनांक 27 जुलाई, 2025 रविवार को दुर्गापुर के सिटी सेंटर सृजनी सभागार में संपन्न हुआ।
उखड़ा आदर्श हिंदी हाई स्कूल, उखड़ा नेहरू विद्यापीठ, खास काजोरा हिंदी हाई स्कूल, रियल कजरा हिंदी हाई स्कूल, अंडाल महावीर हिंदी हाई स्कूल, अंडाल हिंदू हिंदी हाई स्कूल, नेताजी हिंदी हाई स्कूल बेनाचिटी, बेनाचिटी भारतीय हिंदी हाई स्कूल, पूर्व इंटरनेशनल स्कूल, जूम इंटरनेशनल स्कूल, गुरु तेग बहादुर पब्लिक स्कूल, धन्दाबाद हिंदी हाई स्कूल, डीएभी मॉडल स्कूल, डीएभी स्कूल रानीगंज, नेपाली पाड़ा हिंदी हाई स्कूल, सगरभंगा हिंदी हाई स्कूल, बुदबुद चट्टी हिंदी हाई स्कूल, पानागढ़ हिंदी हाई स्कूल आदि 17 विद्यालयों के 125 प्रतिभागियों ने इस प्रतियोगिता में अंशग्रहण किया।
प्रतियोगिता का आद्योपांत संचालन शिक्षक दिनेश राम, संतोष कुमार शर्मा, वरीष्ठ अनुवादक जय प्रकाश झा, श्वेता देब एवं बलिराम चौधरी ने किया। प्रतियोगिता के लिए कक्षा 7 से 12 तक के विद्यार्थियों को तीन वर्ग समूहों में विभाजित किया गया था।
प्रतियोगिता का शुभारंभ करते हुए मंच के समन्वयक जयप्रकाश नारायण ओझा जी ने कहा कि भारत प्रेमचन्द जी का ऋणी है, उन्होंने अपनी कहानियों और उपन्यासों से हिंदी साहित्य को समृद्ध किया है। साहित्य समाज का दर्पण होता है, यह उनकी रचनाओं का पाठ करने से सहज ही प्रमाणित हो जाता है।
मंच के अध्यक्ष श्री एस एस उपाध्याय जी ने कहा कि मंच कई सालों से ऐसे रचनात्मक आयोजनों का साक्षी रहा है। महासचिव धर्मेंद्र यादव ने अपने संबोधन में बच्चों के सार्वभौमिक विकास में मंच के द्वारा वर्ष भर किए जाने वाले कार्यक्रमों का जिक्र किया तथा युवाओं को अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए पाठ्येतर गतिविधियों में बढ़चढकर भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
मंच के वरिष्ठ सलाहकार विश्वजीत मजूमदार ने प्रतिभागियों को संबोधित किया। अपने उद्गार में उन्होंने प्रेमचंद जी के वैश्विक साहित्य में अतुलनीय भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्हें नोबल साहित्य पुरस्कार न मिलने पर खेद जताया।
मंच के कार्यकारी अध्यक्ष सत्यदेव ओझा, उपाध्यक्ष शंकर गुप्ता, सत्येंद्र तिवारी ने अपने अपने विचार रखे। डॉ. प्रदीप कुमार यादव ने आभार संबोधन किया।
पूरे कार्यक्रम के संचालन में श्याम कुमार मंडल, नारायण राजभर, शिक्षक डॉ. जितेंद्र मिश्र, विजय महत्तो, संजय कुमार मिश्रा आदि के साथ सृजनी सभागार के कर्मचारियों का सक्रिय सहयोग मिला।
सभी वर्गों के विजेता प्रतिभागियों को मंच के आगामी कार्यक्रम में पुरस्कृत किए जाने की सूचना उनके द्वारा उपलब्ध कराए गए व्हाट्सएप पर भेज दी जाएगी।
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