मुंबई | 8 नवंबर 2025 — विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) ने FICCI के सहयोग से मुंबई में राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सर्वेक्षण 2024–25 पर एक संवेदनशीलता कार्यशाला आयोजित की।
इस कार्यशाला में उद्योग, शिक्षाविदों, अनुसंधान संस्थानों और सरकारी एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। उद्देश्य था — डेटा-आधारित नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाना और नीति निर्माण के लिए साक्ष्य-आधारित इनपुट तैयार करना।
📊 सर्वेक्षण की विशेषताएँ
- तीन वित्तीय वर्षों को कवर करेगा: 2021–22, 2022–23, 2023–24
- MSME और स्टार्टअप्स के लिए अलग सर्वेक्षण भी किया जा रहा है
- R&D निवेश, मानव संसाधन क्षमता और नवाचार परिणामों का मूल्यांकन
- नीति निर्माण, वैश्विक बेंचमार्किंग और रणनीतिक योजना के लिए आधार तैयार करेगा
इस कार्यक्रम में उद्योग, शिक्षाविदों, अनुसंधान संस्थानों और सरकारी एजेंसियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। कार्यशाला का उद्देश्य सर्वेक्षण में उद्योग और अकादमिक सहभागिता को बढ़ावा देना तथा भारत के डेटा-आधारित नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को सशक्त बनाना था।

🗣️ प्रमुख वक्तव्यों की झलक
- प्रो. अभय करंदीकर (DST सचिव):
“विकसित भारत के लक्ष्य के लिए अनुसंधान और नवाचार को विकास का केंद्र बनाना होगा”
- डा. विवेक कुमार सिंह (नीति आयोग):
“यह साक्ष्य-आधारित विज्ञान नीति की रीढ़ है”
- डा. अरविंद कुमार:
“रणनीतिक योजना और संसाधन आवंटन की नींव यही सर्वेक्षण रखेगा”
- डा. मुर्तज़ा खोराकीवाला (वॉकहार्ट):
“यह भारत के नवाचार सामर्थ्य का दर्पण है — अब ज़रूरत है सशक्त उद्योग-अकादमिक साझेदारी की”
कार्यशाला का समापन इस आह्वान के साथ हुआ कि सभी हितधारक मिलकर भारत को नवाचार-प्रधान अर्थव्यवस्था के रूप में आगे बढ़ाएँ।
🧭 कार्यशाला का उद्देश्य
- निजी क्षेत्र, स्टार्टअप्स और अकादमिक संस्थानों की भागीदारी को प्रोत्साहित करना
- R&D डेटा की पारदर्शिता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना
- भारत को नवाचार-प्रधान अर्थव्यवस्था के रूप में आगे बढ़ाना
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