।।मैं झुकने वाला नहीं।।
डॉ. विक्रम चौरसिया
(राष्ट्र और मानवता का प्रण)
सुनो ध्यान से ये कहानी नहीं, आग है,
छोटी उम्र में ही जीवन बना रणभूमि का राग है।
हर मोड़ पर धोखा, हर कदम पर वार मिला,
पर हर बार गिरकर भी, मुझको नया उछाल मिला।
ईर्ष्या की नजरें, अपने ही खंजर बने,
खींचते रहे पाँव, पर हौसले अमर बने।
मैं वो चिंगारी हूँ, जो अब शोला बन जाएगी,
राष्ट्रभक्ति की ये आग, हर अन्याय मिटाएगी।
ना नाम चाहिए, ना कोई ताज चाहिए,
मुझे बस कर्मों का सच्चा अंदाज़ चाहिए।
मानवता मेरी पूजा, राष्ट्र मेरा धर्म है,
मेरी हर एक सांस अब देश के नाम है।
ना जाति, ना मजहब बस इंसानियत की पहचान,
हर दिल में प्रेम हो, यही मेरा अरमान।
मैं रुकूँगा नहीं, मैं झुकूँगा नहीं,
जब तक इस सीने में जान है,
हर सांस बोलेगी बस एक ही नाम
मेरा भारत, मेरी शान है!
चिंतक/ मेंटर/ एक्टिविस्ट/ दिल्ली विश्वविद्यालय
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