कोलकाता हिन्दी न्यूज | 15 जुलाई 2026: फिक्की लेजेंड्स सीरीज़ के तहत आयोजित विशेष व्याख्यान में पद्म विभूषण, रॉयल सोसाइटी के फेलो और सीएसआईआर के पूर्व महानिदेशक डॉ. आर. ए. माशेलकर ने कहा कि डीप-टेक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और समावेशी नवाचार विकसित भारत 2047 की सबसे मजबूत आधारशिला बन सकते हैं।
“Winning Through Innovation: Lessons for Industry and Society” विषय पर बोलते हुए उन्होंने जोर दिया कि भारत को वैश्विक तकनीकों का उपभोक्ता नहीं, बल्कि विश्वस्तरीय नवाचारों का निर्माता बनना होगा।
भारत के नवाचार मॉडल की पहचान
डॉ. माशेलकर ने अपनी चर्चित अवधारणा “More from Less for More” को भारत के विकास का मंत्र बताते हुए कहा: “नवाचार का उद्देश्य कम संसाधनों में अधिक लोगों तक विश्वस्तरीय और किफायती समाधान पहुंचाना होना चाहिए। उत्कृष्टता, किफायत और समावेशिता ही भारत के नवाचार मॉडल की पहचान बनें।”
उन्होंने स्मार्टफोन आधारित टीबी जांच, एआई आधारित रोग पहचान, डिजिटल मातृ स्वास्थ्य और बिना रक्त निकाले एनीमिया जांच जैसी भारतीय तकनीकों का उदाहरण देते हुए कहा कि भारत ने सीमित संसाधनों में भी वैश्विक स्तर के समाधान विकसित करने की क्षमता साबित की है।
डॉ. माशेलकर ने सरकार से डीप-साइंस, विघटनकारी तकनीकों और उच्च जोखिम वाले अनुसंधान में निवेश बढ़ाने का आह्वान किया।
अन्य प्रमुख वक्ताओं के विचार
- आर. वी. कनोरिया (फिक्की के पूर्व अध्यक्ष): “नवाचार ही भारत की आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता और तकनीकी नेतृत्व तय करेगा।”
- अंकित मेहता (ideaForge के सह-संस्थापक एवं सीईओ): “‘More from Less for More’ करोड़ों लोगों के जीवन में बदलाव लाने वाले जन-केंद्रित नवाचार का मार्ग दिखाता है।”
कार्यक्रम में उद्योग, स्टार्टअप, अनुसंधान संस्थानों और नीति निर्माताओं के प्रमुख प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
निष्कर्ष: डॉ. आर. ए. माशेलकर का यह संबोधन विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए नवाचार, आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शन है।
उनकी ‘More from Less for More’ अवधारणा न सिर्फ प्रासंगिक है बल्कि भविष्य के भारत के लिए प्रेरणादायक भी साबित होगी।
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