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डॉ. आर.बी. दास की रचना…

वक्त ठहरा कहां है,
वक्त चलता जाता है,
धीरे धीरे जिंदगी में,
सब बदलता जाता है,
ले आता है गम कभी,
कभी जिंदगी को
खुशियों से भर जाता है,
छीन लेता है
कुछ लोगों को हमसे,
कुछ लोगों को हमारा कर जाता है,
कौन अपना है,
कौन पराया,
चेहरा सभी का
दिखा जाता है,
ये वक्त हमें धीरे
धीरे,
सब कुछ सिखा जाता है…!!
टूटा दिल
छूटा बचपन
जिंदगी में दोबारा
नहीं मिलता,
नफरतों में क्या रखा है,
मोहब्बत से जीना सीखो,
क्योंकि…
ये दुनिया न तो
हमारा घर है,
और ना ही अपना ठिकाना,
उजालों में कोई न
कोई,
मिल ही जाएगा,
तलाश उसकी कीजिए,
जो अंधेरों में भी साथ दे,
सुखी जीवन के लिए,
अच्छे घर होना जरूरी नहीं,
बल्कि घर के अच्छे माहौल का होना
जरूरी है…!!

Dr. R.B. Das
Adv. supreme court,
Advisor (UGC)
National Sec.
SC/ST commission

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