सूर्य धीरे धीरे निकलता है,
ऊपर उठता है और दुनियां को प्रकाशित करता है।
उसी तरह सब्र के साथ जो व्यक्ति आगे बढ़ता है,
वो एक दिन निश्चित ही ऊपर उठकर,
अपनी तकदीर बदलता है।
सभी कहते है दुनियां बदल गई,
क्या बदला है दुनियां में,
मिर्ची ने अपनी
तीखापन नहीं बदला,
आम ने अपनी मिठास नहीं बदली,
पत्तों ने अपना
हरा रंग नहीं बदला,
बदली है तो इंसान
ने अपनी इंसानियत,
और दोष देता है
पूरी दुनिया को…!!
जो अपना ना हुआ,
उसपर कभी अपना हक मत जताइए,
और जो समझ ना सके उसे,
अपना दर्द कभी मत बताइए,
जो होकर भी ना हो
उसका होना कैसा,
अगर रिश्ता बस नाम का हो,
तो फिर रोना कैसा…!!

Adv. supreme court,
Advisor (UGC)
National Sec.
SC/ST commission
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