उज्जैन । राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना केंद्र उज्जैन, हिंदी परिवार एवं भारतीय ज्ञानपीठ उज्जैन का संयुक्त आयोजन विश्व विख्यात उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद जी के जयंती समारोह का आयोजन संचेतना महोत्सव एवं आजादी के अमृत महोत्सव में संपन्न हुआ। संचैतमहोत्सव के अंतर्गत राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी में मुंशी प्रेमचंद का सामाजिक सरोकार के संदर्भ में आयोजित हुई राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना के 200 आभासी संगोष्ठी संपन्न होने पर संस्था के राष्ट्रीय मुख्य संयोजक डॉ. साहबुद्दीन शेख, मार्गदर्शक डॉ. हरिसिंह पाल के निर्देशानुसार राष्ट्रीय 5 पदाधिकारियों को अभिनंदन पत्र, साल और श्रीफल से सम्मानित करने का निर्णय हुआ था।

जिसमें मुख्य विचारक डॉ. शैलेंद्र कुमार शर्मा, मार्गदर्शक सुवर्णा जाधव, श्रेष्ठ संयोजक डॉ. अनुसूया अग्रवाल, श्रेष्ठ आयोजक डॉ. प्रभु चौधरी, श्रेष्ठ संचालक डॉ. मुक्ता कौशिक को सम्मानित किया गया। राष्ट्रीय शिक्षक संचेतना द्वारा कोरोना महामारी के अवसर पर आभासी संगोष्ठी – महापुरुषों की जयंती समारोह, साहित्यिक संगोष्ठी, राष्ट्रीय नई शिक्षा नीति, काव्य गोष्ठी आदि अनेक विषयों पर आयोजित की गई। जिसमें संपूर्ण विश्व से लगभग 50 अतिथि एवं 200 वक्ताओं ने अपने उद्गार व्यक्त किए। आयोजन समिति एवं 100 विशेष अतिथियों एवं 150 विशिष्ट वक्ताओं का भी योगदान रहा।

संचेतना महोत्सव में मुख्य अतिथि विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के माननीय कुलपति डॉ. अखिलेश पांडे विशिष्ट अतिथि कृष्ण मंगल सिंह कुलश्रेष्ठ, सुवर्णा जाधव, सारस्वत अथिति डॉ. अशोक भार्गव आईएएस पूर्व संभाग आयुक्त, मुख्य वक्ता डॉ. शैलेंद्र कुमार शर्मा अध्यक्षता बृजकिशोर शर्मा ने की। संगोष्ठी का संचालन राष्ट्रीय महासचिव डॉ. प्रभु चौधरी ने, सरस्वती वंदना मणि माला शर्मा ने, स्वागत भाषण राजकुमार यादव ने एवं आभार सुनीता राठौर ने माना इस अवसर पर देशभर के अनेक साहित्यकार कवि और कवियित्री उपस्थित रहे।

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