डीपी सिंह की कुण्डलिया

तन मन धन सबको पड़ा, बीस, सभी पर बीस।

नई सोच कुछ दे गया, और दे गया टीस।।

और दे गया टीस, ईश ही केवल जाने।

भाता है इक्कीस, कि आता भृकुटी ताने।।

भजो राम का नाम, छोड़कर सारी अनबन।

भली करें भगवान, सुखी हों सबके तन-मन।।

Shrestha Sharad Samman Awards

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

nineteen + six =