डीपी सिंह की कुण्डलिया

चलते हैं सरकार के, बिल पर बिल के बान।
रहे विपक्षी बिलबिला, बैठे तम्बू तान।।
बैठे तम्बू तान, सड़क पर हठधर्मी-से।
हरकत से हैं चीन, पाक के सहकर्मी-से
खोटे सिक्के नित्य, मूँग छाती पर दलते।
जो हैं सभी रिजेक्ट, नहीं मार्केट में चलते।।
Shrestha Sharad Samman Awards

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

four × 3 =