कोलकाता हिन्दी न्यूज | 11 अगस्त 2026: डॉक्टरों को आमतौर पर स्वास्थ्य का सबसे बड़ा प्रहरी माना जाता है, लेकिन क्या लगातार तनाव, अनियमित दिनचर्या और काम के दौरान होने वाला रेडिएशन एक्सपोजर उनकी सेहत पर भारी पड़ रहा है?
‘पश्चिम बंगाल में ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों की एक बैठक में डॉक्टरों के स्वास्थ्य से जुड़ी ऐसी ही चिंताएं सामने आई हैं।
वेस्ट बंगाल ऑर्थोपेडिक एसोसिएशन के विशेषज्ञों ने ऑर्थोपेडिक सर्जनों के काम के दौरान C-Arm मशीन से निकलने वाले एक्स-रे रेडिएशन के संपर्क और उससे जुड़े संभावित स्वास्थ्य जोखिमों पर चिंता जताई।
आम लोगों और डॉक्टरों की औसत आयु में अंतर का दावा
खबर के मुताबिक, आम आबादी की औसत जीवन प्रत्याशा करीब 72.3 वर्ष बताई गई है, जबकि डॉक्टरों के लिए यह आंकड़ा करीब 64 से 67 वर्ष के बीच होने का दावा किया गया है।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के एक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए यह दावा किया गया कि चिकित्सकों की औसत आयु आम लोगों की तुलना में कम देखी गई है।
हालांकि, अलग-अलग अध्ययनों में जीवन प्रत्याशा के आंकड़े और पद्धति अलग हो सकती है, इसलिए इन आंकड़ों को व्यापक आबादी पर अंतिम निष्कर्ष के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
ऑर्थोपेडिक सर्जनों की सेहत पर ज्यादा जोखिम?
विशेषज्ञों के मुताबिक, ऑर्थोपेडिक सर्जनों का काम कई मामलों में अन्य चिकित्सा विशेषज्ञों की तुलना में अलग तरह का जोखिम लेकर आता है। हड्डियों के फ्रैक्चर, डिसलोकेशन, स्क्रू लगाने और स्पाइन सर्जरी जैसी प्रक्रियाओं के दौरान C-Arm मशीन का इस्तेमाल किया जाता है।
यह मशीन ऑपरेशन के दौरान शरीर के अंदर की हड्डियों और अन्य संरचनाओं की लाइव इमेज उपलब्ध कराने में मदद करती है, जिससे सर्जन को सटीक तरीके से प्रक्रिया करने में सहायता मिलती है।
लेकिन इसके साथ एक्स-रे रेडिएशन का एक्सपोजर भी होता है।
C-Arm मशीन से निकलने वाला रेडिएशन क्यों चिंता का विषय?
C-Arm मशीन मूल रूप से एक्स-रे तकनीक पर काम करती है। ऑर्थोपेडिक सर्जन और ऑपरेशन थिएटर में मौजूद मेडिकल स्टाफ को यदि लंबे समय तक बार-बार रेडिएशन के संपर्क में आना पड़े, तो व्यावसायिक विकिरण जोखिम को कम करना महत्वपूर्ण हो जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार शरीर के कुछ हिस्से, खासकर आंखें और हाथ, इस तरह के एक्सपोजर के लिहाज से संवेदनशील हो सकते हैं।
इसी वजह से ऑपरेशन के दौरान रेडिएशन से बचाव के लिए उचित सुरक्षा उपायों का इस्तेमाल बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
आंखों पर भी पड़ सकता है असर
ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों ने आंखों की समस्याओं को लेकर भी चिंता जताई। डॉक्टरों के मुताबिक, लंबे समय तक रेडिएशन के संपर्क में रहने वाले सर्जनों में आंखों से जुड़ी समस्याओं पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
विशेषज्ञों ने बताया कि कुछ डॉक्टरों को आंखों के इलाज के लिए दक्षिण भारत के चिकित्सा केंद्रों तक जाना पड़ता है और इनमें ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों की संख्या भी देखने को मिलती है।
हालांकि, किसी व्यक्ति में आंखों की समस्या का कारण केवल C-Arm रेडिएशन है, ऐसा निष्कर्ष मेडिकल जांच के बिना नहीं निकाला जा सकता।
अनियमित जीवनशैली भी बड़ी वजह
डॉक्टरों की सेहत पर केवल रेडिएशन ही नहीं, बल्कि लंबे काम के घंटे, नींद की कमी, तनाव और अनियमित जीवनशैली का भी असर पड़ सकता है।
ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ डॉ. उत्पल बंद्योपाध्याय के मुताबिक, डॉक्टरों की जीवनशैली काफी अनियमित होती है। उन्हें पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता और लंबे समय तक काम करने के कारण तनाव तथा हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं।
यानी डॉक्टरों के स्वास्थ्य पर काम का दबाव और कार्यस्थल से जुड़े जोखिम दोनों का असर पड़ सकता है।
ऑर्थोपेडिक सर्जनों के लिए सुरक्षा क्यों जरूरी?
C-Arm मशीन का इस्तेमाल आधुनिक ऑर्थोपेडिक सर्जरी का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। इसे पूरी तरह हटाना व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि इससे सर्जन को ऑपरेशन के दौरान महत्वपूर्ण इमेजिंग सहायता मिलती है।
ऐसे में विशेषज्ञों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है कि रेडिएशन एक्सपोजर को यथासंभव कम रखा जाए। इसके लिए ऑपरेशन थिएटर में रेडिएशन सुरक्षा प्रोटोकॉल, उचित दूरी, शील्डिंग और व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल महत्वपूर्ण होता है।
डॉक्टरों के स्वास्थ्य पर गंभीर चर्चा की जरूरत
ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों द्वारा उठाई गई चिंता केवल एक पेशे तक सीमित नहीं है। डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ लंबे समय तक कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं। ऐसे में उनके लिए नियमित स्वास्थ्य जांच, पर्याप्त आराम और कार्यस्थल पर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना भी जरूरी है।
C-Arm रेडिएशन को लेकर सामने आई चिंताएं इस बात की ओर इशारा करती हैं कि आधुनिक चिकित्सा तकनीक के इस्तेमाल के साथ मेडिकल प्रोफेशनल्स की सुरक्षा को भी उतनी ही प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
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