वाराणसी। दिशाशूल वह दिशा है जिस तरफ यात्रा नहीं करना चाहिए! हर दिन किसी ना किसी दिन एक दिशा की ओर दिशाशूल माना जाता है। यानी उस दिन उस दिशा में यात्रा करना वर्जित है।
किस दिन किस दिशा में यात्रा वर्जित है!
1) सोमवार और शनिवार को पूर्व में।
2) रविवार और शुक्रवार को पश्चिम में।
3) मंगलवार और बुधवार को उत्तर में।
4) गुरूवार को दक्षिण में।
5) सोमवार और गुरूवार को दक्षिण-पूर्व में।
6) रविवार और शुक्रवार को दक्षिण-पश्चिम में।
7) मंगलवार को उत्तर-पश्चिम में।
8) बुधवार और शनिवार को उत्तर-पूर्व में।
परन्तु यदि एक ही दिन यात्रा करके उसी दिन वापिस आ जाना हो तो ऐसी दशा में दिशाशूल का विचार नहीं किया जाता है।
परन्तु यदि कोई आवश्यक कार्य हो और उसी दिशा की तरफ यात्रा करनी पड़े, जिस दिन वहाँ दिशाशूल हो तो यह उपाय करके यात्रा कर लेनी चाहिए।
रविवार : दलिया और घी खाकर।
सोमवार : दर्पण देखकर।
मंगलवार : गुड़ खा कर।
बुधवार : तिल, धनिया खा कर।
गुरूवार : दही खाकर।
शुक्रवार : जौ खाकर।
शनिवार : अदरक अथवा उड़द की दाल खा कर।
साधारणतया दिशाशूल का इतना विचार नहीं किया जाता परन्तु यदि व्यक्ति के जीवन का अति महत्वपूर्ण कार्य है, तो दिशाशूल का ज्ञान होने से व्यक्ति मार्ग में आने वाली बाधाओं से बच सकता है। उसके लिए चौघड़ियों का भी प्रयोग कर सकता है।
ज्योतिर्विद रत्न वास्तु दैवज्ञ
पंडित मनोज कृष्ण शास्त्री
मो. 99938 74848
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