स्वतंत्रता सेनानियों ने अपनी मातृभाषा के समान हिंदी को महत्ता दी – कुलपति प्रो. पांडेय
उज्जैन। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय उज्जैन की हिंदी अध्ययनशाला और ललित कला अध्ययनशाला के संयुक्त तत्वावधान में हिंदी पखवाड़े के अंतर्गत राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की गई। यह संगोष्ठी भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन और राष्ट्रभाषा हिंदी पर केंद्रित थी। संगोष्ठी के मुख्य अतिथि जयपुर के कुलपति प्रो. नंदकिशोर पांडेय थे।
आयोजन में सारस्वत अतिथि उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय, हल्द्वानी के कुलपति प्रो. नवीन चंद्र लोहनी हल्द्वानी, केंद्रीय हिंदी संस्थान आगरा के निदेशक डॉ. सुनील कुलकर्णी, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के कुलानुशासक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा, लोक मनीषी डॉ. पूरन सहगल, प्रो. गीता नायक एवं प्रो. जगदीश चंद्र शर्मा ने विचार व्यक्त किए।
कुलपति प्रो. नंदकिशोर पांडेय, जयपुर ने कहा कि सभी की पहचान उनकी अपनी भाषा से होती है। भारत के राष्ट्रीय आंदोलन में गांधी जी ने हिंदी को देश के स्वाभिमान के साथ जोड़ा। उस दौर में महात्मा गांधी, लोकमान्य तिलक हिंदी को प्राथमिकता दे रहे थे। अनेक स्वतंत्रता सेनानियों ने अपनी मातृभाषा के समान हिंदी को महत्ता दी।
आज अकुंठ भाव से हिंदी के पक्ष में बोलने की जरूरत है। हम जिस भाषा को बोल या लिख नहीं सकते, उसमें हस्ताक्षर करने का क्या अर्थ है। देश के प्रत्येक नागरिक का एक हस्ताक्षर हिंदी को बल देता है।
कुलपति प्रो. नवीनचंद्र लोहनी, हल्द्वानी उत्तराखंड ने हिंदी के विकास में सभी की सहभागिता का आह्वान किया। प्रो. सुनील कुलकर्णी ने कहा कि भारत सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा राजभाषा हिंदी के विकास के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। डॉ. पूरन सहगल मनासा ने कहा कि हिंदी का विकास लोक भाषाओं की प्रगति से जुड़ा है।
अध्यक्षता करते हुए कुलानुशासक प्रो. शैलेंद्र कुमार शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीय आंदोलन के दौर में देश-दुनिया में अनेक हिंदी सेवी संस्थाओं की स्थापना हुई, जिन्होंने सांस्कृतिक स्वराज्य के लिए अपना अविस्मरणीय योगदान दिया।
उस दौर में प्रकाशित अनेक हिंदी पुस्तकों और पत्रिकाओं को प्रतिबंध भी झेलना पड़ा, लेकिन लेखकों और सम्पादकों ने आजादी के संघर्ष को पूरी दृढ़ता से बनाए रखा।
कार्यक्रम के प्रारम्भ में अतिथियों द्वारा सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन ललित कला विभागाध्यक्ष प्रो. जगदीश चंद्र शर्मा ने किया। आभार प्राध्यापिका डॉ. अरुणा दुबे ने माना।
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