कोलकाता हिन्दी न्यूज | 30 अगस्त 2026: देशभर में ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ को लेकर बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की वंदना हो रही है। इसी बीच पश्चिम बंगाल के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री दिलीप घोष अपने एक बयान को लेकर विवादों में घिर गए हैं।
उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ के रचयिता के तौर पर रवींद्रनाथ ठाकुर का नाम ले लिया। उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है।
दिलीप घोष ने रक्षाबंधन समारोह में बोलते हुए दावा किया कि रवींद्रनाथ ठाकुर ने ‘वंदे मातरम्’ गीत लिखकर बंगाल विभाजन के विरोध में आंदोलन को मजबूती दी थी। बाद में एक अन्य कार्यक्रम में भी उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ के रचयिता के तौर पर कविगुरु का नाम दोहराया।
हालांकि, ऐतिहासिक तथ्य यह है कि ‘वंदे मातरम्’ की रचना बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। रवींद्रनाथ ठाकुर ने कांग्रेस के 1896 के कलकत्ता अधिवेशन में ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया था। इसी वजह से दोनों नामों के बीच भ्रम की संभावना को लेकर भी चर्चा होती रही है।
रक्षाबंधन कार्यक्रम में क्या बोले दिलीप घोष?
रक्षाबंधन उत्सव में दिलीप घोष ने कहा, “भारतवर्ष की राखी हमारी एक परंपरा है। पश्चिम बंगाल में उस राखी को भाई-बहन के रिश्ते के बंधन से बाहर निकालकर रवींद्रनाथ ठाकुर ने ‘वंदे मातरम्’ गीत लिखकर बंगाल विभाजन रद्द कराया था।”
दिलीप घोष यहीं नहीं रुके। एक अन्य कार्यक्रम में उन्होंने फिर कहा, “हम रक्षाबंधन भी कर रहे हैं और वंदे मातरम् भी गा रहे हैं। पहले जो लोग नहीं गाते थे, वे भी अब गाने के लिए मजबूर हो रहे हैं। यही असली बदलाव है। वंदे मातरम् गीत कविगुरु ने लिखा था।”
उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई।
तृणमूल का तंज
दिलीप घोष के बयान पर तृणमूल कांग्रेस नेता और बेलेघाटा के विधायक कुणाल घोष ने निशाना साधा। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि बीजेपी नेताओं की ओर से दिए जा रहे ऐसे ‘उपहारों’ को देखते हुए बीजेपी परिवार के लिए नया पाठ्यक्रम तैयार करने की जरूरत है।
तृणमूल की ओर से आरोप लगाया गया कि ‘वंदे मातरम्’ जैसे ऐतिहासिक और राष्ट्रीय महत्व के गीत के रचयिता का नाम ही गलत बताना गंभीर तथ्यात्मक भूल है।
बीजेपी प्रवक्ता ने दी सफाई
हालांकि, दिलीप घोष के बचाव में प्रदेश बीजेपी के प्रवक्ता देवजीत सरकार सामने आए। उन्होंने कहा कि उन्हें विश्वास नहीं है कि दिलीप घोष जानबूझकर गलत बात कहेंगे। उनके मुताबिक, ‘वंदे मातरम्’ अलग-अलग रूपों में गाया गया है और रवींद्रनाथ ठाकुर ने भी इसे एक रूप में गाया था।
बीजेपी प्रवक्ता की इस सफाई के बावजूद दिलीप घोष के बयान को लेकर विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है।
क्या है ‘वंदे मातरम्’ का इतिहास?
‘वंदे मातरम्’ की रचना बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। यह उनकी प्रसिद्ध रचना ‘आनंदमठ’ का हिस्सा है और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह राष्ट्रीय चेतना का महत्वपूर्ण प्रतीक बन गया था।
रवींद्रनाथ ठाकुर का भी ‘वंदे मातरम्’ के इतिहास में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में इस गीत का गायन किया था। यही वजह है कि ‘वंदे मातरम्’ के संदर्भ में रवींद्रनाथ ठाकुर का नाम भी ऐतिहासिक रूप से जुड़ा हुआ है, लेकिन गीत के रचयिता बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ही हैं।
150 साल पूरे होने पर देशभर में कार्यक्रम
‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर केंद्र सरकार की ओर से देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी दौरान पश्चिम बंगाल के एक बीजेपी मंत्री द्वारा गीत के रचयिता के तौर पर रवींद्रनाथ ठाकुर का नाम लिए जाने से राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है।
अब देखना होगा कि दिलीप घोष अपने बयान पर कोई स्पष्टीकरण देते हैं या नहीं। फिलहाल उनका बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक मंचों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।
ताज़ा समाचार और रोचक जानकारियों के लिए आप हमारे कोलकाता हिन्दी न्यूज चैनल पेज को सब्स्क्राइब कर सकते हैं। एक्स (ट्विटर) पर @hindi_kolkata नाम से सर्च कर, फॉलो करें।

