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को-एक्टर्स से दोस्ती हो या न हो, अभिनय पर नहीं पड़ना चाहिए असर: डायना पेंटी

मुंबई | 5 जनवरी 2026: अभिनय की दुनिया में सिर्फ किरदार निभाना ही काफी नहीं होता, बल्कि निजी रिश्तों और भावनाओं से ऊपर उठकर प्रोफेशनल बने रहना भी उतना ही जरूरी होता है।

अभिनेत्री डायना पेंटी का मानना है कि एक सच्चे कलाकार की पहचान यही होती है कि वह अपने सह-कलाकारों के साथ निजी समीकरण चाहे जैसे भी हों, कैमरे के सामने पूरी ईमानदारी से अपने किरदार को निभाए।

अपनी नई स्ट्रीमिंग सीरीज ‘डू यू वाना पार्टनर’ के प्रमोशन के दौरान समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में डायना पेंटी ने अभिनय, प्रोफेशनलिज्म और को-एक्टर्स के साथ काम करने के अनुभव पर खुलकर बात की।

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डायना पेंटी ने कहा, “एक अच्छे अभिनेता के लिए यह बेहद जरूरी है कि वह निजी रिश्तों को अपने काम पर हावी न होने दे। चाहे आप किसी सह-कलाकार के साथ दोस्त हों या नहीं, स्क्रीन पर जो दिखता है, वह पूरी तरह से किरदार की मांग पर आधारित होना चाहिए, न कि व्यक्तिगत संबंधों पर।”

तमन्ना भाटिया के साथ काम करने का अनुभव

सीरीज में अपनी सह-कलाकार तमन्ना भाटिया के साथ काम करने को लेकर डायना ने कहा कि सेट पर दोनों के बीच अच्छी बॉन्डिंग बनी, जिससे काम करना सहज हो गया।

उन्होंने कहा, “हम दोनों के बीच सेट पर माहौल काफी सकारात्मक था। हालांकि, मेरी सोच यही है कि अभिनय की असली परीक्षा तब होती है, जब कलाकार निजी रिश्तों से अलग रहकर अपने किरदार को पूरी सच्चाई से निभा पाए।”

डायना के मुताबिक, ऑफ-स्क्रीन सहजता का असर कई बार ऑन-स्क्रीन भी दिखाई देता है। “जब कलाकार एक-दूसरे के साथ कंफर्टेबल होते हैं, तो इम्प्रोवाइज करने की आज़ादी मिलती है। इससे सीन में एक अलग तरह की सच्चाई और ऊर्जा आती है, जिसे दर्शक भी महसूस करते हैं।”

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प्रोफेशनलिज्म सबसे अहम

तमन्ना के साथ अपनी केमिस्ट्री पर बात करते हुए डायना ने कहा कि दोनों बिना किसी झिझक के अपनी राय साझा कर पाती थीं। “हम खुलकर सीन, डायलॉग और एक्सप्रेशन पर चर्चा करते थे। ऐसा माहौल हर प्रोजेक्ट में नहीं मिलता और जब मिलता है, तो उसका असर सीधे काम की गुणवत्ता पर दिखता है।”

हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि “कलाकारों की अच्छी बॉन्डिंग काम को आसान बना देती है, लेकिन एक अभिनेता को हर हाल में प्रोफेशनल रहना चाहिए। निजी रिश्ते कभी भी किरदार से बड़े नहीं होने चाहिए। अभिनय एक ऐसी कला है, जिसमें अनुशासन और आत्म-नियंत्रण सबसे जरूरी है।”

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