अनिल बेदाग, मुंबई | 10 नवंबर 2025 : ध्यान फाउंडेशन ने महाराष्ट्र के भंडारा और सतारा जिलों में स्थित अपनी गौशालाओं में 4000 से अधिक गौवंशों को अवैध तस्करी और कत्लखानों से बचाकर सुरक्षित आश्रय प्रदान किया है।
यह पहल उन नंदी और दूध न देने वाली गायों के लिए जीवनदान साबित हुई है, जिन्हें अक्सर अत्याचार, भूख और उपेक्षा का सामना करना पड़ता है।
🏡 गौशालाओं की विशेषताएँ
- स्थान: बरधाकिनी, खरबी, गराडा (भंडारा) और कराडा (सतारा)
- सेवाएँ:
- 24×7 निगरानी के लिए प्रशिक्षित पैरा-वेट्स
- पौष्टिक चारा, स्वच्छ पानी, मौसम के अनुसार आश्रय
- सौर ऊर्जा और वर्षा जल संचयन की व्यवस्था
- स्वास्थ्य देखभाल: घायल और बीमार पशुओं के लिए चिकित्सा सुविधा
🧭 संदेश और प्रेरणा
“गौसेवा सिर्फ धर्म नहीं, दया और विकास का रास्ता है।” ध्यान फाउंडेशन की यह पहल पशु कल्याण को सामाजिक पुनर्निर्माण से जोड़ती है, और यह दिखाती है कि करुणा से भी बदलाव संभव है।
अक्सर घायल, भूखे-प्यासे और अत्याचार झेल चुके ये गौवंश यहां प्रेम, देखभाल और चिकित्सा सुविधा के साथ स्वस्थ जीवन पा रहे हैं। फाउंडेशन ने 24 घंटे निगरानी के लिए प्रशिक्षित पैरा-वेट्स और सहायकों को नियुक्त किया है।

पौष्टिक चारा, स्वच्छ पानी, और मौसम के अनुरूप आश्रय से लेकर सौर ऊर्जा और वर्षा जल संचयन तक, हर सुविधा का ध्यान रखा गया है।
👨🌾 ग्रामीण विकास और रोजगार
- 100 से अधिक ग्रामीणों को रोज़गार
- स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिला नया संबल
- पशु सेवा के साथ सामाजिक सशक्तिकरण का मॉडल
इन गौशालाओं ने 100 से अधिक ग्रामीणों को रोज़गार देकर स्थानीय अर्थव्यवस्था में नई जान फूंकी है। ध्यान फाउंडेशन न सिर्फ पशु संरक्षण बल्कि शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संवर्धन के कार्यों में भी अग्रणी है।
देशभर में अपने 45 आश्रयों के ज़रिए यह संस्था 70,000 से अधिक जानवरों की सेवा कर रही है।
🌱 ध्यान फाउंडेशन की व्यापक भूमिका
- देशभर में 45 आश्रय केंद्र
- 70,000 से अधिक जानवरों की सेवा
- शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण में भी अग्रणी
- सस्टेनेबल मॉडल: पशु कल्याण के साथ सामाजिक और पारिस्थितिक लाभ



