नेशनल न्यूज डेस्क | 07 सितम्बर 2026: घर के भीतर परिवार सो रहा हो और अचानक धरती के नीचे से जोरदार धमाका सुनाई दे। कुछ ही क्षणों में दीवारों में दरारें पड़ने लगें, फर्श खिसक जाए और मकान का एक हिस्सा जमीन के भीतर समा जाए। बाहर निकलें तो गहरा गोफ, जहरीली गैस, कहीं आग की लपटें और धुआं। धनबाद के कोयलांचल में इन दिनों जिंदगी ऐसी ही दहशत के बीच गुजर रही है।
संकट की जड़
धनबाद के कोयलांचल में जमीन के भीतर कोयले में लगी 100 साल से अधिक पुरानी आग इस संकट की बड़ी वजह है। इस साल जनवरी से अब तक कोयलांचल में भू-धंसान और गोफ बनने की 45 से अधिक छोटी-बड़ी घटनाएं सामने आ चुकी हैं।
अगस्त और सितंबर में बारिश के साथ घटनाओं की रफ्तार बढ़ी है।
हाल की घटनाएं
पिछले 10 दिनों में कई घटनाएं हुईं:
- 31 अगस्त: लिलोरी पथरा में जमीन धंसने से घर का हिस्सा गोफ में समा गया।
- 1 सितंबर: गोधर छह नंबर में गहरे गोफ की भराई शुरू। कैलूडीह में गोफ और गैस रिसाव।
- 3 सितंबर: बरारी छह नंबर में धमाके के साथ जमीन फटी, आग और जहरीला धुआं।
- 4 सितंबर: कुर्मी डीह में दो बड़े गोफ बने, गैस रिसाव से दहशत।
इस साल सबसे भयावह घटना 6 अगस्त को कतरास के छाताबाद में हुई, जहां 20 से अधिक मकान प्रभावित हुए और कई लोग घायल हुए।
प्रशासनिक कार्रवाई
स्थानीय लोगों ने भारी ब्लास्टिंग को जिम्मेदार ठहराया। धनबाद उपायुक्त ने 14 अगस्त को वैज्ञानिक अध्ययन पूरा होने तक प्रभावित क्षेत्र में ब्लास्टिंग और खनन रोकने का निर्देश दिया। खान सुरक्षा महानिदेशालय ने न्यू आकाशकिनारी कोलियरी में नियंत्रित डीप-होल ब्लास्टिंग की अनुमति वापस ले ली।
प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर ने 31 अगस्त और 1 सितंबर को धनबाद का दौरा कर बीसीसीएल की गतिविधियों, झरिया की भूमिगत आग और पुनर्वास कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने सुरक्षित और सम्मानजनक पुनर्वास को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया।
विशेषज्ञों की राय और पुनर्वास
विशेषज्ञों के अनुसार, समस्या दशकों के भूमिगत खनन, छोड़ी गई पुरानी खदानों, भूमिगत आग और जमीन के भीतर बने खाली हिस्सों से जुड़ी है। मानसून में बारिश इन कमजोर हिस्सों को और कमजोर बनाती है।
बीसीसीएल के तकनीकी एवं संचालन निदेशक संजय कुमार सिंह ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल सुरक्षित आवास प्राथमिकता है। संशोधित झरिया मास्टर प्लान के तहत 5,940 करोड़ रुपये की राशि से पुनर्वास और आजीविका व्यवस्था तेज की जा रही है।
निष्कर्ष:
धनबाद कोयलांचल में भूमिगत आग और भू-धंसान का संकट गंभीर बना हुआ है। सुरक्षा व्यवस्था और पुनर्वास की रफ्तार को लेकर सवाल उठ रहे हैं। असली चुनौती प्रभावित परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
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