- हिंदू महासभा ने प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति भवन और रेल मंत्री को भेजा प्रस्ताव
कोलकाता हिन्दी न्यूज | 16 सितम्बर 2026: पश्चिम बंगाल में सड़कों और मेट्रो स्टेशनों के नाम बदलने की चर्चाओं के बीच अब हावड़ा जिले के देउलटी रेलवे स्टेशन का नाम बदलने की मांग उठी है। साहित्यकार शरतचंद्र चट्टोपाध्याय की स्मृतियों से जुड़े इस स्टेशन का नाम उनके सम्मान में रखने का प्रस्ताव दिया गया है।
अखिल भारत हिंदू महासभा की पश्चिम बंगाल शाखा ने इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति कार्यालय और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र सौंपा है। संगठन की ओर से मंगलवार को दिल्ली में एक प्रतिनिधिमंडल ने रेल मंत्री को ज्ञापन भी दिया।
‘शरतचंद्र चट्टोपाध्याय रेलवे स्टेशन’ रखने की मांग
हिंदू महासभा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. चंद्रचूड़ गोस्वामी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने स्टेशन का नाम बदलने के औचित्य को पत्र में विस्तार से बताया है।
चंद्र गोस्वामी के अनुसार, दেউलटी और उसके आसपास का क्षेत्र शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के जीवन और साहित्य से गहराई से जुड़ा हुआ है। बंगला साहित्य में उनके असाधारण योगदान के कारण यह स्थान उनकी स्थायी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।
संगठन ने मांग की है कि दেউलटी रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर ‘शरतचंद्र चट्टोपाध्याय रेलवे स्टेशन’ रखा जाए। इसके पीछे साहित्यिक विरासत के संरक्षण, पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय लोगों की भावनाओं के सम्मान को प्रमुख आधार बताया गया है।
रूपनारायण नदी के किनारे बिताया जीवन का लंबा समय
शरतचंद्र चट्टोपाध्याय ने हावड़ा के देउलटी रेलवे स्टेशन से लगभग तीन किलोमीटर दूर रूपनारायण नदी के किनारे स्थित एक घर में अपने जीवन का लंबा समय बिताया था। यह स्थान उनके साहित्यिक जीवन और रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ा रहा है।
कहा जाता है कि रूपनारायण नदी और उसके आसपास का प्राकृतिक वातावरण उनकी कई रचनाओं का साक्षी रहा। ‘देना-पावना’ और ‘शेष प्रश्न’ जैसे उपन्यासों सहित उनकी अनेक कहानियों और साहित्यिक कृतियों से इस क्षेत्र का संबंध बताया जाता है।
सरकार ने संरक्षित किया साहित्यकार का आवास
पश्चिम बंगाल सरकार की पहल पर शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के देउलटी स्थित आवास को संरक्षित किया गया है। उनके पुराने घर में आज भी उनके उपयोग की कई वस्तुएं और फर्नीचर सुरक्षित रखे गए हैं।
पर्यटकों और साहित्यप्रेमियों को इस ऐतिहासिक आवास को देखने का अवसर मिलता है। स्थानीय स्तर पर यह स्थान शरतचंद्र की साहित्यिक विरासत से जुड़े महत्वपूर्ण पर्यटन केंद्र के रूप में भी जाना जाता है।
नाम परिवर्तन से पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद
हिंदू महासभा का कहना है कि स्टेशन का नाम शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के नाम पर रखने से क्षेत्र की पहचान और मजबूत होगी। इससे देश-विदेश से आने वाले साहित्यप्रेमियों और पर्यटकों को इस स्थान से जुड़ने में सुविधा होगी।
अब प्रस्ताव केंद्र सरकार और रेलवे के विचाराधीन है। स्टेशन का नाम बदलने को लेकर अंतिम निर्णय संबंधित सरकारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लिया जाएगा।
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