कोलकाता। पश्चिम बंगाल में इस समय डेंगू और मलेरिया के मामले तेजी से बढ़े हैं। स्थिति ये है कि रोजाना 500 से 600 मामले सामने आ रहे हैं। साथ ही अगले हफ्ते से दुर्गा पूजा शुरू है, जिसने पश्चिम बंगाल सरकार की टेंशन थोड़ी और बढ़ा दे ही। स्थिति ये है कि स्वास्थ्य सचिव नारायण स्वरूप निगम और स्वास्थ्य निदेशक सिद्धार्थ न्योगिरा ने प्रदेश के निजी अस्पतालों के साथ बैठक की और स्थिति के बारे में गंभीर बातचीत की है।

राज्य के स्वास्थ्य विभाग की आशंका है कि अक्टूबर तक डेंगू और मलेरिया के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा सकती है। ऐसे में प्रदेश सरकार ने कुछ गाइडलाइन्स जारी किए हैं। बंगाल सरकार ने डेंगू और मलेरिया से पीड़ित लोगों के लिए कुछ खास दिशा निर्देश दिए हैं, जिसमें उन्होंने सरकारी अस्पतालों में इलाज को सस्ता करने की बात कही है। इन निर्देशों में सरकार ने बताया है कि

  • पहले तो डेंगू-मलेरिया से पीड़ित कोई भी व्यक्ति अगर किसी निजी अस्पताल में भर्ती है, तो अस्पताल इसकी सूचना स्वास्थ्य भवन पोर्टल पर दे।
  • हर निगर में फीवर क्लीनिक खोला गया जिसमें निःशुल्क बुखार और डेंगू व मलेरिया के लक्षणों की बात की गई है।
  • इलाज के लिए निजी अस्पतालों में डेंगू प्रोटोकॉल का पालन किया जाए और इलाज को बहुत मेहंगा ना बनाया जाए।
  • साथ ही कोलकाता नगरपालिका सहित शहर के कई नगरपालिका में डेंगू के खिलाफ ड्राइव चलाया जाए और लोगों को सचेत किया जाए।

राज्य सरकार ने बताया कि पिछले 24 घंटों में डेंगू के कुल 566 मामले सामने आए हैं, जिनमें से ज्यादातर मामले कोलकाता और उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, हावड़ा, हुगली, दार्जिलिंग और मुर्शिदाबाद जिलों से सामने आए हैं। बैठक के सरकार का कहना है कि, भले ही लोगों में दहशत है क्योंकि हर आने वाले सप्ताह में डेंगू और मलेरिया के मामले बढ़ रहे हैं। पर इससे इतना घबराने की जरूरत नहीं है। स्थिति को कंट्रोल किया जा सकता है।

साथ ही निजी अस्पतालों को डेंगू के इलाज की चिकित्सा लागत पर गौर करने और इसे कम करने के उपाय करने को कहा गया है। हमें लोगों के जेब से खर्च को कम करने के लिए कहा गया है। हम निश्चित रूप से इस पर गौर करेंगे। तो, घबराएं नहीं बस डेंगू-मलेरिया से जितना हो सके उतना बचने की कोशिश करें।

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