दिल्ली सिटी डेस्क | 18 दिसंबर 2025 : राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए सरकार ने आज से ‘नो पीयूसी, नो फ्यूल’ नियम लागू कर दिया है। अब बिना वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट वाले वाहनों को किसी भी पेट्रोल पंप पर ईंधन नहीं दिया जाएगा।
यह कदम दिल्ली में लगातार बिगड़ती हवा की गुणवत्ता और खतरनाक स्मॉग के बीच एक बड़े नियंत्रण उपाय के रूप में देखा जा रहा है।
🚗 बीएस‑6 के अलावा कोई बाहरी वाहन दिल्ली में प्रवेश नहीं करेगा
दिल्ली में बाहर से आने वाली गाड़ियों के लिए भी सख्त नियम लागू किए गए हैं—

- केवल BS‑6 मानक वाले वाहन ही दिल्ली में प्रवेश कर सकेंगे
- कंस्ट्रक्शन मटीरियल ले जाने वाले ट्रकों पर बैन जारी
- ग्रैप (GRAP) के तहत निर्माण कार्य पर रोक जारी, उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई
सरकार का कहना है कि वाहनों, धूल, कचरे और ट्रैफिक जाम से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए यह कदम जरूरी है।
🛑 126 चेकपॉइंट, 580 पुलिसकर्मी और 37 प्रखर वैन तैनात
नियम को लागू करने के लिए दिल्ली में बड़े पैमाने पर निगरानी व्यवस्था की गई है—
- 126 चेकपॉइंट, जिनमें बॉर्डर पॉइंट भी शामिल
- 580 पुलिसकर्मी तैनात
- 37 प्रखर वैन निगरानी के लिए
- पेट्रोल पंपों पर वॉयस अलर्ट सिस्टम
- एएनपीआर कैमरों से रियल‑टाइम मॉनिटरिंग
ट्रांसपोर्ट विभाग की एनफोर्समेंट टीमें पेट्रोल पंपों और बॉर्डर चेकपॉइंट पर मौजूद रहेंगी।
🗣️ पर्यावरण मंत्री मंजिंदर सिंह सिरसा का बयान
पर्यावरण मंत्री ने कहा कि—
- लोग खतरनाक स्मॉग के संपर्क में हैं
- सरकार कई मोर्चों पर काम कर रही है
- पीयूसी सिस्टम में पूरी तरह बदलाव किया जाएगा
- थर्ड‑पार्टी मॉनिटरिंग शुरू होगी
- पूरे शहर के लिए कार‑पूलिंग ऐप लाया जाएगा
- इंटीग्रेटेड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम को अपग्रेड किया जाएगा
- मशीनीकृत सड़क‑सफाई को बड़े पैमाने पर बढ़ाया जाएगा
उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे चेकपॉइंट या पेट्रोल पंप पर अधिकारियों से बहस न करें, क्योंकि यह कदम जन‑स्वास्थ्य और बच्चों के भविष्य के लिए है।
🏢 50% वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य
ट्रैफिक का बोझ कम करने और प्रदूषण घटाने के लिए—
- सरकारी और निजी संस्थानों में 50% वर्क फ्रॉम होम लागू
- दिल्ली सरकार गूगल मैप्स और मैप इंडिया के साथ मिलकर ट्रैफिक हॉटस्पॉट की पहचान के लिए लाइव डेटा का उपयोग करेगी
🔍 निष्कर्ष
दिल्ली में प्रदूषण नियंत्रण के लिए यह अब तक का सबसे सख्त कदम माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि यदि नागरिक सहयोग करें, तो आने वाले दिनों में हवा की गुणवत्ता में सुधार देखने को मिल सकता है।
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