कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष बिमान बनर्जी ने बुधवार को कहा कि राष्ट्रीय प्रतीक को कथित तौर पर विरूपित नहीं किया जाना चाहिए था। बनर्जी ने कहा कि खासतौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में ऐसा नहीं होना चाहिए था और यह एक दंडनीय अपराध है। प्रधानमंत्री मोदी ने सोमवार को नए संसद भवन की छत पर राष्ट्रीय प्रतीक का अनावरण किया था। विपक्षी दलों के सदस्यों ने मंगलवार को सरकार पर अशोक की लाट के ‘‘मोहक और राजसी शान वाले’’ शेरों की जगह उग्र शेरों का चित्रण कर राष्ट्रीय प्रतीक के स्वरूप को बदलने का आरोप लगाया और इसे तत्काल बदलने की मांग की।

वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आरोप को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को निशाना बनाने की एक और ‘‘साजिश’’ बताकर खारिज कर दिया। बनर्जी का यह बयान इसी विवाद की पृष्ठभूमि में आया है। उन्होंने कहा, ‘‘ हमारे देश में एक कानून है,जिसके तहत राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्र गान को विरूपित करना एक दंडनीय अपराध है। यही बात राष्ट्रीय प्रतीक पर भी लागू होती है। मुझे आश्चर्य है कि किस प्रकार से राष्ट्रीय प्रतीक को विरूपित किया जा रहा है और वह भी प्रधानमंत्री की मौजूदगी में। ऐसा नहीं होना चाहिए था।’’

तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पार्थ चटर्जी ने दावा किया कि यह ‘‘विकृति’’ देश के इतिहास को विरूपित करने के भाजपा के प्रयासों का हिस्सा है। उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा सरकार को लोगों से जुड़े मुद्दों की जरा भी परवाह नहीं है। वह सांप्रदायिक ध्रुवीकरण तथा इतिहास से छेड़छाड़ में ही व्यस्त है।’’ वहीं, भाजपा की पश्चिम बंगाल इकाई के अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस के आरोप निराधार हैं। उन्होंने कहा, ‘‘ राष्ट्रीय प्रतीक के साथ कोई दिक्कत नहीं है। शेर मांसाहारी है, इसलिए तृणमूल जिस अंतर को दिखाने की कोशिश कर रही है वह निराधार है।

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