Mamata murmu

राष्ट्रपति मुर्मू की यात्रा विवाद के बीच दार्जिलिंग के डीएम मनीष मिश्रा का तबादला

कोलकाता | 13 मार्च 2026: पश्चिम बंगाल सरकार ने शुक्रवार को दार्जिलिंग के जिलाधिकारी (डीएम) मनीष मिश्रा का तबादला कर उन्हें राज्य के गृह विभाग में विशेष सचिव के पद पर नियुक्त किया है।

यह प्रशासनिक फेरबदल उस समय हुआ है जब राष्ट्रपति Droupadi Murmu की हालिया पश्चिम बंगाल यात्रा को लेकर विवाद खड़ा हो गया था और केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा कुछ अधिकारियों की सेवाएं केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर लेने की चर्चा सामने आई थी।

राज्य सरकार की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक, मिश्रा को राज्य गृह विभाग में विशेष सचिव के पद पर तैनात किया गया है।

सुनील अग्रवाल को मिला दार्जिलिंग डीएम का अतिरिक्त प्रभार

सरकार की अधिसूचना के अनुसार पश्चिम बंगाल सिविल सेवा (डब्ल्यूबीसीएस) के वरिष्ठ अधिकारी सुनील अग्रवाल को दार्जिलिंग के जिलाधिकारी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।

अग्रवाल फिलहाल उत्तर बंगाल विकास विभाग में विशेष सचिव के पद पर कार्यरत हैं।

राज्य सरकार की अधिसूचना में बताया गया कि यह प्रशासनिक बदलाव तत्काल प्रभाव से लागू होगा।

राष्ट्रपति की यात्रा को लेकर बढ़ा विवाद

यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब खबरें आईं कि Ministry of Home Affairs राष्ट्रपति की हालिया उत्तर बंगाल यात्रा के दौरान हुए विवाद के संदर्भ में कुछ अधिकारियों की सेवाएं केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर लेने पर विचार कर रहा है।

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सूत्रों के अनुसार केंद्र सरकार ने इस मामले में राज्य सरकार से राय भी मांगी है, हालांकि इस संबंध में अभी तक न तो गृह मंत्रालय और न ही राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि की गई है।

बागडोगरा सम्मेलन के दौरान शुरू हुआ विवाद

विवाद की शुरुआत पिछले सप्ताह उस समय हुई जब राष्ट्रपति Droupadi Murmu उत्तर बंगाल के दार्जिलिंग जिले के बागडोगरा के पास आयोजित नौवें अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन में शामिल होने पहुंची थीं।

इस कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति ने उत्तर बंगाल के आदिवासी क्षेत्रों में विकास की कमी का मुद्दा उठाया था। इसके बाद राज्य की राजनीति में तीखी बहस शुरू हो गई।

ममता बनर्जी और प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया

राष्ट्रपति के बयान के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी थी।

वहीं प्रधानमंत्री Narendra Modi ने तृणमूल कांग्रेस पर राष्ट्रपति का अपमान करने का आरोप लगाया था।

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बताया गया कि राष्ट्रपति ने कार्यक्रम स्थल में अंतिम समय में किए गए बदलाव पर भी असंतोष जताया था।

2020 के विवाद की भी आई याद

ताजा घटनाक्रम ने 2020 में केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच हुए एक बड़े प्रशासनिक टकराव की यादें भी ताजा कर दी हैं।

उस समय J. P. Nadda के दक्षिण 24 परगना दौरे के दौरान उनके काफिले पर हमले के बाद केंद्र सरकार ने तीन आईपीएस अधिकारियों की सेवाएं केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर मांगी थीं।

हालांकि मुख्यमंत्री Mamata Banerjee के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने अधिकारियों को केंद्र के पास भेजने से इनकार कर दिया था।

इस फैसले के बाद केंद्र और राज्य सरकार के बीच लंबे समय तक गतिरोध बना रहा था।

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