बद्रीनाथ साव, दक्षिणदारी, कोलकाता | 28 सितंबर 2025: इस वर्ष दक्षिणदारी यूथ्स ने दुर्गा पूजा में ‘दहन’ थीम को केंद्र में रखते हुए एक ऐसा मंडप तैयार किया है, जो नारी के सामाजिक संघर्ष, दमन के विरुद्ध प्रतिरोध, और अंततः शक्ति रूप में उदय को दर्शाता है।
मंडप का हर दृश्य, मूर्ति की मुद्रा और कलात्मक प्रस्तुति एक कथा की तरह आगे बढ़ती है — जहां नारी सिर्फ पूजनीय नहीं, बल्कि संघर्षशील और निर्णायक भी है।
यह थीम नारी के सदियों के संघर्ष, उत्पीड़न और फिर राख से उठकर शक्ति के रूप में सामने आने की कहानी कहती है। नारी सशक्तिकरण को बढ़ावा देती हुयी पंडाल के भव्य सजावट ने सबको मंत्रमुग्ध कर दिया है।
कोलकाता हिंदी न्यूज़ की तरफ से दक्षिणदारी यूथ्स को “संवाद शक्ति सम्मान” से सम्मानित किया गया है।
- ‘दहन’ – अग्निपरीक्षा से एसिड अटैक तक
पंडाल का केंद्रीय विचार “दहन” महिलाओं द्वारा झेली गई वास्तविक और प्रतीकात्मक “अग्नियों” को दर्शाता है। यह सीता की अग्निपरीक्षा से लेकर द्रौपदी के अपमान की अग्नि तक, और आधुनिक युग में एसिड हमलों की भयावह वास्तविकता तक, महिलाओं के इतिहास को दर्शाता है।
पंडाल में प्रदर्शित जानकारी के अनुसार, भारत में हर साल सैकड़ों एसिड हमले होते हैं और घरेलू हिंसा, बाल विवाह और मानव तस्करी जैसी समस्याएं आज भी समाज में व्याप्त हैं।
थीम की कलात्मक विशेषताएं:
- –मंडप संरचना: जली हुई लकड़ियों, राख, और धुएं के प्रतीकात्मक प्रयोग से ‘दहन’ को रूप दिया गया
- मूर्ति प्रस्तुति: देवी दुर्गा को अग्नि से पुनर्जन्म लेती शक्ति के रूप में दर्शाया गया
- साउंड डिजाइन: पृष्ठभूमि में नारी स्वर, संघर्ष की ध्वनि, और शक्ति की गर्जना
- इंस्टॉलेशन आर्ट: घरेलू हिंसा, सामाजिक असमानता और शिक्षा के अभाव को दर्शाने वाले दृश्य
- प्रतीकात्मक सिंदूरदान: महिलाओं द्वारा स्वयं को शक्ति रूप में स्वीकारने की क्रिया
नारी की अदम्य शक्ति का प्रतीक
यह थीम केवल महिलाओं के खिलाफ हिंसा को उजागर नहीं करती, बल्कि उनकी अदम्य भावना और प्रतिरोध को भी सलाम करती है। पंडाल का संदेश स्पष्ट है: हर दहन से, हर अग्नि से, महिलाएं राख से उठकर दुर्गा के रूप में, शक्ति के अवतार के रूप में उभरी हैं।
यह पंडाल इस बात का साक्षी है कि कैसे महिलाएं इन ‘अग्नियों’ को अपनी शक्ति का स्रोत बनाकर एक नए प्रतिरोध की भाषा गढ़ रही हैं।
- आयोजकों का संदेश:
“हमने ‘दहन’ को सिर्फ अग्नि नहीं, बल्कि नारी के भीतर जलते सवालों और उनके उत्तर की यात्रा माना है।” — क्लब संयोजक
- माँ दुर्गा – सहनशीलता और परिवर्तन का केंद्र
पंडाल के केंद्र में माँ दुर्गा की प्रतिमा स्थापित है, जो सहनशीलता और परिवर्तन का प्रतीक हैं। वे हर दर्दनाक अनुभव को शक्ति में बदलने की प्रेरणा देती हैं, और नारी शक्ति के इस अदम्य स्वरूप को दर्शाती हैं।
- एक सशक्त सामाजिक संदेश
दक्षिणदारी यूथ्स का यह प्रयास न केवल एक उत्सव का आयोजन है, बल्कि यह एक सशक्त सामाजिक संदेश भी है जो समाज को महिलाओं के प्रति सम्मान और न्याय के लिए प्रेरित करता है, और उनकी सहनशीलता तथा शक्ति का जश्न मनाता है।
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