पुस्तक समीक्षा – “दाह”
लेखक– डॉ. अरुणा सोनी
शिवोहम प्रकाशन कोलकाता/ हैदराबाद
shivohamphouse@outlook.com
उपन्यास का शीर्षक “दाह” अपने आप में प्रतीकात्मक है, जो केवल बाहरी अग्नि नहीं, बल्कि मनुष्य के अंतर्मन में जलती हुई उस अदृश्य वेदना का संकेत देता है।
उपन्यास की मूल संवेदना
उपन्यास की भूमिका से ही स्पष्ट हो जाता है कि लेखिका जीवन को अत्यंत संवेदनशील दृष्टि से देखती हैं। उन्होंने पंचमहाभूतों के माध्यम से जीवन की दार्शनिक व्याख्या करते हुए बताया है कि प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी रूप में भीतर से जलता रहता है।
यही “दाह” इस उपन्यास की मूल संवेदना बनकर पूरी कथा में प्रवाहित होती है।
कथानक और पात्र
कथानक की शुरुआत भारत-विभाजन की भीषण त्रासदी से होती है। विभाजन के कारण उजड़े परिवारों का दर्द, घर-बार छोड़ने की विवशता, असुरक्षा और नई भूमि पर पुनः जीवन आरंभ करने का संघर्ष अत्यंत यथार्थ रूप में चित्रित किया गया है।
हेमप्रताप, जानकी, सुनम तथा उनके परिवार के माध्यम से लेखिका ने दिखाया है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी साहस, परिश्रम और पारिवारिक एकता मनुष्य को आगे बढ़ने की शक्ति प्रदान करती है।
उपन्यास की सबसे बड़ी विशेषता इसके जीवंत पात्र हैं। हेमप्रताप आदर्श, कर्तव्यनिष्ठ और परिवार-प्रेमी के रूप में उभरते हैं, जबकि जानकी भारतीय नारी के त्याग, धैर्य और समर्पण की सशक्त प्रतीक हैं। प्रत्येक पात्र इतना स्वाभाविक है कि पाठक उनके सुख-दुःख से सहज ही जुड़ जाता है।
भाषा, शैली और सामाजिक पक्ष
भाषा की दृष्टि से उपन्यास अत्यंत सहज, सरल एवं साहित्यिक है। लेखिका ने सूक्तियों, लोकगीतों, मुहावरों और भावपूर्ण संवादों का सुंदर प्रयोग किया है। वर्णन शैली इतनी सजीव है कि पाठक स्वयं को घटनाओं का प्रत्यक्ष साक्षी अनुभव करता है।
उपन्यास का सामाजिक पक्ष भी अत्यंत सशक्त है। इसमें स्त्री जीवन की संवेदनाएँ, पारिवारिक उत्तरदायित्व, रिश्तों की जटिलता और मानवीय संघर्षों को गहराई से उकेरा गया है।
लेखिका का संदेश स्पष्ट है — परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन हों, धैर्य, विश्वास और सकारात्मक सोच के साथ हर चुनौती का सामना किया जा सकता है।
निष्कर्ष: “दाह” एक ऐसा उपन्यास है जो पाठक को केवल कहानी नहीं सुनाता, बल्कि जीवन की वास्तविकताओं और मानवीय संवेदनाओं की गहराई तक ले जाता है।
डॉ. अरुणा सोनी की यह कृति हिंदी साहित्य की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो पठनीय तो है ही, साथ ही मनन करने योग्य भी है। गंभीर साहित्य प्रेमियों के लिए “दाह” निश्चित रूप से एक संग्रहणीय रचना सिद्ध होगी।
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