कोलकाता। भवानीपुर एजुकेशन सोसायटी कॉलेज के शिक्षा विभाग की ओर से 3 अगस्त 2026 को “एक दूरदर्शी व्यक्ति का सम्मान और एक विरासत का जश्न – डॉ. श्यामा प्रसाद” शीर्षक से एक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया। यह कार्यक्रम छात्रों के लिए अनुभवात्मक और प्रासंगिक शिक्षा प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया था, जो सीवीएसी (वीओएलएस2) पाठ्यक्रम का एक अनिवार्य घटक है।
सेमेस्टर II (सीवीएसी वीओएलएस) के 80 छात्रों द्वारा प्रस्तुत कार्यक्रम में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी को भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई और श्यामा प्रसाद मुखर्जी और राष्ट्र के लिए उनके स्थाई योगदान को याद किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. रेखा नारीवाल ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के व्यक्तित्व पर परिचयात्मक वक्तव्य दिया, जिसने इस अवसर के लिए एक विचारशील माहौल तैयार किया। अपनी प्रारंभिक टिप्पणियों में, उन्होंने इस बात पर विचार किया कि कैसे इस आयोजन की कल्पना अनुभवात्मक शिक्षा के लिए एक मंच के रूप में की गई थी, जिसने भूमिका परिवर्तन के माध्यम से लोकतांत्रिक भावना को अपनाया, जिससे छात्रों को जिम्मेदारी और नेतृत्व की स्थिति में कदम रखने की इजाजत मिली।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह के अनुभव उन्हें उन भूमिकाओं के लिए तैयार करने में सहायक थे जिन्हें वे भविष्य में उद्देश्य की गहरी समझ विकसित करने के लिए निभाएंगे। संकाय सदस्य प्रत्युषा सरकार, प्रियोम रॉय और ऐशन्या त्रिपाठी मिश्रा ने दीप प्रज्ज्वलित करके छात्रों का नेतृत्व किया, जिससे इस अवसर की एक गंभीर और शानदार शुरुआत हुई। भाषण समूह ने डॉ. मुखर्जी के जीवन, उनके आदर्शों और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान पर विचारशील अंतर्दृष्टि प्रदान की।
मनमोहक संगीतमय प्रस्तुतियों से माहौल और समृद्ध हो गया, जिससे कार्यक्रम में गहराई और ऊर्जा आ गई। “भाषाई विविधता और राष्ट्रीय पहचान को संतुलित करना : डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का पुनरावलोकन” विषय पर एक सार्थक चर्चा ने उनके दृष्टिकोण और समकालीन समय में इसकी प्रासंगिकता पर विचार करने के लिए आमंत्रित किया। छात्रों ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचारोत्तेजक संवादों के साथ बुना हुआ एक आकर्षक नृत्य प्रदर्शन भी प्रस्तुत किया, जिसने इस कार्यक्रम में आकर्षण और गहराई दोनों जोड़ दी।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण नाटकीय प्रस्तुति थी, जिसकी रचनात्मकता और प्रभाव को दर्शकों ने खूब सराहा। यह कार्यक्रम एक जोरदार नोट पर संपन्न हुआ, क्योंकि पूरा सभागार राष्ट्रीय गीत से गूंज उठा, जो गर्व, सम्मान और प्रेरणा की भावना को पीछे छोड़ गया। इस कार्यक्रम की जानकारी डॉ. वसुंधरा मिश्र ने दी।
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