बस यूं ही बरबस तेरी याद फिर आ गई
झूमती सुनहरी सुबह धीमी-धीमी सी
रिमझिम बरसात फिर आ गई
सुहानी पुरवाई और सावन की बहार बचपन की
धुंधली-धुंधली सी याद फिर आ गई
सड़कों पर पानी और पानी में तैरती
कागज की हमारी वो कश्ती फिर आ गई
सावन के गीत गीतों में महादेव की याद
शिव भक्त कांवड़ियों का विश्वास चल कर
हरिद्वार से घर आ गए
बिछड़े कई बरस हो गए तुम से ए गांव
देख पेट पालने गांव छोड़ आज शहर आ गए।
अर्जुन तितौरिया

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