कोलकाता | 18 दिसंबर 2025 : पश्चिम बंगाल में Special Intensive Revision (SIR) के तहत जारी की गई ड्राफ्ट मतदाता सूची अब बड़े राजनीतिक विवाद का कारण बन गई है। ताजा मामले में CPM के वरिष्ठ नेता मोहम्मद सलीम के नाम और पहचान को लेकर गंभीर गड़बड़ी सामने आई है, जिसने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में मोहम्मद सलीम का उपनाम कथित तौर पर बदलकर ‘अवस्थी’ दर्ज कर दिया गया, जिसके बाद वाम दलों ने इसे “प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित साजिश” करार दिया है।
🧾 क्या है पूरा मामला?
CPM का आरोप है कि—

- ड्राफ्ट मतदाता सूची में नाम, उपनाम और पहचान से जुड़ी गंभीर त्रुटियां हैं
- सिर्फ आम मतदाताओं ही नहीं, बल्कि प्रमुख राजनीतिक नेताओं के विवरण में भी बदलाव किया गया
- यह गड़बड़ी मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर सीधा हमला है
पार्टी नेताओं का कहना है कि जब एक वरिष्ठ नेता का नाम ही गलत दर्ज हो सकता है, तो आम मतदाताओं के साथ क्या हो रहा होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
🗣️ CPM का चुनाव आयोग पर हमला
CPM नेतृत्व ने चुनाव आयोग से— तुरंत स्पष्टीकरण, ड्राफ्ट लिस्ट की व्यापक पुनःजांच और दोषियों पर जवाबदेही तय करने की मांग की है।
पार्टी का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के जरिए मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हेरफेर की कोशिश की जा रही है, जिससे आगामी विधानसभा चुनाव प्रभावित हो सकते हैं।
🔥 विपक्ष पहले से हमलावर
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब—
- लाखों मतदाताओं के नाम कटने या बदले जाने की आशंका जताई जा रही है
- TMC, CPM और कांग्रेस पहले ही SIR प्रक्रिया पर सवाल उठा चुके हैं
- कई दलों ने इस मुद्दे को लेकर न्यायिक हस्तक्षेप की मांग भी की है
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से जुड़े ऐसे मामले राज्य की राजनीति को और गर्मा सकते हैं।
🧩 आगे क्या?
चुनाव आयोग की ओर से अब तक इस विशेष मामले पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों के अनुसार आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया के दौरान सुधार का दावा किया जा रहा है। फिर भी, विपक्ष इसे केवल “तकनीकी गलती” मानने को तैयार नहीं है।
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