देश-दुनिया को गहरे जख्म दे गया गुजरा साल 2020

गुजरा साल 2020 देश और दुनिया को लंबे समय तक याद रहने वाला ज़ख्म दे गया । साल की शुरुआत यानि जनवरी में एनआरसी व सीएए के विरोध में शहर दर शहर हिंसा और विरोध प्रदर्शन की आग में झुलसते रहे। फरवरी में हुए दंगों से देश की राजधानी दिल्ली दहली रही । इसी महीने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड टर्ंप भारत आए । इसके बाद मध्य प्रदेश में सत्ता परिवर्तन का खेल शुरू हो गया । मार्च के अंतिम सप्ताह तक समूचे देश में लागू लॉक डाउन से देश में हाहाकार मच गया।

अप्रेल – मई तक प्रवासी श्रमिकों की समस्या तकरीबन हर राज्य को प्रभावित करती रही । जून में फिल्म अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्ध मौत की घटना ने बॉलीवुड को दहला दिया । इस विवाद की आग कई महीने तक महसूस की जाती रही । इस बीच शुरू हुए मानसून ने बिहार और असम समेत कई राज्यों में बाढ़ के रुप में कहर ढाना शुरु किया । अगस्त में अयोध्या में राममंदिर का शिलान्यास हुआ । सितंबर – अक्टूबर तक देश कोरोना के आतंक के बावजूद त्योहारों की खुमारी में डूबा रहा । नवंबर – दिसंबर में समूचे देश में रिकॉर्ड संख्या में शादियां हुई । इस बीच अपेक्षा के अनुरूप ठंड भी पड़ी ।

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