निशान्त, Climate कहानी, कोलकाता | 15 नवंबर 2025 — COP30 के दौरान ब्राज़ील की प्रेसीडेंसी ने Integrated Forum on Climate Change and Trade (IFCCT) की शुरुआत की। यह पहली बार है जब जलवायु और व्यापार के बीच बढ़ते तनाव को कम करने और साझा संवाद का मंच देने की कोशिश इतनी स्पष्टता से सामने आई है।
🎯 फ़ोरम का उद्देश्य
- देशों को एक खुला मंच देना
- जलवायु कार्रवाई और व्यापार नियमों के बीच संतुलन पर चर्चा
- कोई binding negotiation नहीं, बल्कि सहयोग और विचार-विमर्श
- विकासशील देशों को बराबरी का अवसर
इस फ़ोरम का मक़सद सीधा है. देशों को एक ऐसी जगह देना जहाँ वे जलवायु कार्रवाई और वैश्विक व्यापार नियमों के बीच संतुलन पर बात कर सकें, बिना किसी राजनीतिक दबाव के और बिना किसी binding negotiation के.
📌 मुख्य घोषणाएँ
- जिनेवा में 15–19 दिसंबर को ओपन-एंडेड कंसल्टेशन प्रोसेस
- COP30 प्रेसीडेंसी: “ट्रेड जलवायु परिवर्तन से अलग नहीं है”
- ऑस्ट्रेलिया, चीन, न्यूज़ीलैंड और यूके: ट्रेड जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने में निर्णायक
- WTO, Climate Club, Energy Foundation China, ICC और सिविल सोसाइटी संस्थाएँ मौजूद
- EU का प्रतिनिधित्व नहीं, केवल Laurence Tubiana और Michael Apicelli उपस्थित
🗣️ देशों के प्रमुख बयान
- चीन (ली गाओ): “वैश्विक संकट का हल सहयोग में ही है… विकासशील देशों पर असर को शामिल करना होगा।”
- ऑस्ट्रेलिया (विल नैनकर्विस): “ट्रेड और क्लाइमेट जुड़े हैं, तनाव को समझकर आगे बढ़ना होगा।”
- यूके (रचेल काइट): “ट्रेड फ्रेमवर्क को जलवायु एक्शन को सक्षम बनाना चाहिए, रोकना नहीं।”
👩🔬 विशेषज्ञों की प्रतिक्रियाएँ
- डॉ. दाउदा सेम्बेने (Africatalyst): “फ़ोरम विकासशील देशों को न्याय और समावेशन का अवसर देता है।”
- अल्फ़ोंसो मेडिनिला (ECDPM): “EU ने unilateral measures बढ़ाए, WTO पीछे रहा। फ़ोरम संतुलन का मौका है।”
- एली बेल्टन (E3G): “डेवलप और डेवलपिंग देशों के बीच भरोसा टूटा। IFCCT विश्वास बहाल कर सकता है।”
🔍 इसका महत्व
- लॉन्च ऐसे समय हुआ जब EU का CBAM, नए प्रोडक्ट स्टैंडर्ड और tariff-related दबाव विवाद पैदा कर रहे हैं
- ब्राज़ील की पहल का मक़सद:
- तनाव कम करना
- विकासशील देशों को बराबरी का मंच देना
- दिसंबर की जिनेवा कंसल्टेशन तय करेगी कि जलवायु और व्यापार टकराव से सहयोग की ओर बढ़ते हैं या नहीं
इसका मतलब क्या है?
बेलेम में यह फ़ोरम ऐसे समय लॉन्च हुआ है जब दुनिया भर में ट्रेड-बेस्ड क्लाइमेट पॉलिसियाँ, जैसे EU का CBAM, नए प्रोडक्ट स्टैंडर्ड, और tariff-related दबाव गंभीर विवाद को जन्म दे रहे हैं.

ब्राज़ील की यह पहल उन तनावों को कम करने का प्रयास है, और खासकर विकासशील देशों को एक बराबरी का मंच देने का इरादा रखती है.
अब नज़रें दिसंबर पर हैं, जब जिनेवा में पहली कंसल्टेशन शुरू होगी और यह साफ़ होगा कि जलवायु और व्यापार की दुनिया एक दूसरे को टकराने के बजाय साथ लाने का कोई रास्ता ढूंढ पाती है या नहीं.
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