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COP30: बेलेम की गर्म हवा में उभरी नई मल्टीपोलर दुनिया की क्लाइमेट कहानी

Climate कहानी, कोलकाता | 23 नवंबर 2025 :अमेज़न की नमी भरी हवा और आदिवासी ढोल की थाप के बीच आयोजित COP30 ने जलवायु राजनीति को नई दिशा दी। तमाम वैश्विक तनावों के बावजूद, ब्राज़ील की प्रेसीडेंसी ने एक ऐसा ‘बेलेम पॉलिटिकल पैकेज’ पेश किया जिस पर सभी 194 देशों ने सहमति जताई। इसे जलवायु इतिहास में एक नई मल्टीपोलर सहमति के रूप में देखा जा रहा है।

🌟 मुख्य परिणाम

  • क्लाइमेट फाइनेंस: देशों ने 2035 तक हर साल $1.3 ट्रिलियन जुटाने का लक्ष्य तय किया।
  • एडाप्टेशन फंडिंग: अमीर देशों ने गरीब देशों के लिए अनुकूलन फंडिंग को तीन गुना करने का वादा किया।
  • फॉसिल फ्यूल्स पर विवाद: तेल-समृद्ध देशों के विरोध के कारण बाध्यकारी समझौता नहीं हो सका, केवल स्वैच्छिक योजना बनी।
  • वन और आदिवासी अधिकार: ब्राज़ील ने 10 नए आदिवासी क्षेत्रों का सीमांकन घोषित किया, जबकि 3,000 से अधिक आदिवासी नेताओं ने सम्मेलन में भाग लिया।

साल 2025 में दुनिया की राजनीति वैसे ही अशांत थी, ऊपर से अमेरिका का पेरिस समझौते से दोबारा बाहर निकलना।

इसके बावजूद 194 देशों का एक साथ आकर जलवायु कार्रवाई को आगे बढ़ाना दिखाता है कि जलवायु नेतृत्व अब देशों के लिए सिर्फ नैतिक मुद्दा नहीं, बल्कि आर्थिक सुरक्षा का रास्ता भी बन चुका है।

🌟 मुख्य फैसले और घोषणाएँ

  1. ग्लोबल इम्प्लीमेंटेशन एक्सिलरेटर
    • अगले दो साल में देशों की जलवायु योजनाओं और 1.5°C लक्ष्य के बीच की खाई पाटने के लिए तेज़ ट्रैक।
    • COP28 के Fossil Fuel Transition वादों को मजबूत ढंग से आगे बढ़ाने का संकल्प।
  2. जस्ट ट्रांज़िशन मैकेनिज़्म
    • पहली बार देशों ने तकनीकी सहायता, क्षमता निर्माण और सहयोग सुनिश्चित करने वाले ढाँचे पर सहमति दी।
    • ऊर्जा परिवर्तन को न्यायपूर्ण बनाने पर ज़ोर।
  3. दो बड़े रोडमैप (ब्राज़ील की पहल)
    • जीवाश्म ईंधन से चरणबद्ध बाहर निकलने का रोडमैप।
    • 2030 तक वैश्विक स्तर पर वनों की कटाई रोकने और पलटने का रोडमैप।
    • 80–90 देशों का समर्थन, दुर्लभ वैश्विक सहमति।

यही कारण है कि COP30 में एक नए तरह की “cooperative multilateralism” उभरी, जहाँ बड़े और छोटे देश बराबरी से मेज पर बैठे दिखे।

🗣️ बेलेम की गर्म हवा में नई राजनीति

  • ब्राज़ील ने मेज़बानी कर अमेज़न को जलवायु विमर्श के केंद्र में ला दिया।
  • भारत और अफ्रीकी देशों ने फाइनेंस और तकनीक पर अपनी शर्तें रखीं।
  • यूरोप और अमेरिका अब अकेले एजेंडा सेट करने की स्थिति में नहीं रहे।
  • यह सम्मेलन दिखाता है कि जलवायु नेतृत्व अब मल्टीपोलर हो चुका है—जहाँ कई ध्रुव मिलकर वैश्विक दिशा तय कर रहे हैं।

गलत जानकारी और ग्रीनवॉश COP का बड़ा मुद्दा बने हुए थे। इस बार 18 सरकारों ने ‘Information Integrity Declaration’ पर हस्ताक्षर किए। पहली बार EU ने अपनी NDC में क्लाइमेट डिसइन्फॉर्मेशन से लड़ने की प्रतिज्ञा जोड़ी है। इसे लोग “COP of Truth” कह रहे हैं।

💰 जलवायु वित्त पर सहमति

  • 2035 तक एडाप्टेशन फाइनेंस को तीन गुना करने का वादा।
  • $300 बिलियन के नए जलवायु वित्त लक्ष्य के लिए दो साल की कार्ययोजना।
  • $135 मिलियन एडाप्टेशन फंड और $300 मिलियन बेलेम हेल्थ एक्शन प्लान
  • कम से कम $1.3 ट्रिलियन सालाना जलवायु वित्त जुटाने का लक्ष्य।

ब्राज़ील ने जलवायु और व्यापार को जोड़ने वाला नया फ़ोरम लॉन्च किया है, जो एक तरह से भविष्य की वैश्विक क्लाइमेट ट्रेड डिप्लोमेसी की नींव है। साथ ही 20 प्रतिशत वैश्विक उत्सर्जन वाले देश अब एक ग्लोबल कार्बन मार्केट कोलिशन में शामिल हो गए हैं।

⚡ एनर्जी ट्रांज़िशन स्पीड मोड में

  • दक्षिण कोरिया ने कोयले से जल्दी बाहर निकलने का एलान किया।
  • 80+ देशों ने Fossil Fuel Transition रोडमैप का समर्थन किया।
  • ग्रिड, स्टोरेज और क्लीन एनर्जी में 2030 तक $1 ट्रिलियन निवेश
  • मीथेन कटौती के लिए $590 मिलियन जुटाए गए।

बेलेम से निकलती कहानी साफ़ है। दुनिया पहले से कहीं ज्यादा विभाजित है, पर जलवायु कार्रवाई पर बनी यह सहमति दिखाती है कि साझा संकट साझा समाधान मांगता है।

🌳 वन और आदिवासी नेतृत्व: COP30 की आत्मा

  • 90 देशों ने वैश्विक Deforestation Roadmap को समर्थन दिया।
  • $6.5 बिलियन का Tropical Forests Forever Facility लॉन्च।
  • 900+ आदिवासी प्रतिनिधि ब्लू ज़ोन में मौजूद रहे (रिकॉर्ड)।
  • 10 नई आदिवासी भूमि को औपचारिक मान्यता।
  • 15 देशों ने 160 मिलियन हेक्टेयर भूमि अधिकार सुरक्षित करने का संकल्प लिया।

इस COP को लोग कई वजहों से याद रखेंगे। आदिवासी आवाज़ों की अभूतपूर्व मौजूदगी, स्वास्थ्य को जलवायु नीति के केंद्र में लाने की शुरुआत, ट्रेड का जलवायु diplomacy में आधिकारिक प्रवेश, और fossil fuel transition पर इतना बड़ा वैश्विक समर्थन।

⚖️ महत्व और चुनौतियाँ
  • COP30 ने उम्मीद और निराशा दोनों छोड़ी।
  • उम्मीद: फाइनेंस और अनुकूलन पर ठोस कदम।
  • निराशा: फॉसिल फ्यूल्स पर बाध्यकारी समझौते की कमी।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह मल्टीपोलर सहयोग टिकाऊ रहा तो पेरिस समझौते का 1.5°C लक्ष्य बचाया जा सकता है।

📢 सूचना की सच्चाई पर जीत

  • 18 सरकारों ने ‘Information Integrity Declaration’ पर हस्ताक्षर किए।
  • EU ने अपनी NDC में पहली बार क्लाइमेट डिसइन्फॉर्मेशन से लड़ने की प्रतिज्ञा जोड़ी।
  • COP30 को लोग “COP of Truth” कह रहे हैं।

💹 ट्रेड और क्लाइमेट डिप्लोमेसी

  • ब्राज़ील ने जलवायु और व्यापार को जोड़ने वाला नया फ़ोरम लॉन्च किया।
  • 20% वैश्विक उत्सर्जन वाले देश ग्लोबल कार्बन मार्केट कोलिशन में शामिल हुए।

🌍 COP30 की विरासत

बेलेम से निकलती कहानी साफ़ है—दुनिया पहले से कहीं ज्यादा विभाजित है, लेकिन जलवायु कार्रवाई पर बनी यह सहमति दिखाती है कि साझा संकट साझा समाधान मांगता है

COP30 को याद किया जाएगा:

  • आदिवासी आवाज़ों की अभूतपूर्व मौजूदगी।
  • स्वास्थ्य को जलवायु नीति के केंद्र में लाने की शुरुआत।
  • ट्रेड का जलवायु डिप्लोमेसी में आधिकारिक प्रवेश।
  • Fossil Fuel Transition पर व्यापक वैश्विक समर्थन।

बेलेम की हवा भले भारी हो, पर उसमें उम्मीद भी घुली हुई है। अब सवाल यह है कि दुनिया इन वादों को जमीन पर कब और कैसे उतारती है।

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