नई दिल्ली । केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सहकारिता क्षेत्र को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा की गई नीतिगत घोषणाओं की तारीफ करते हुए कहा है कि आरबीआई के फैसले से सहकारिता क्षेत्र को मजबूती मिलेगी। शाह ने सहकारिता क्षेत्र को लेकर मोदी सरकार की प्रतिबद्धिता को एक बार फिर से जाहिर करते हुए कहा कि सहकारिता क्षेत्र में देश के किसान, कृषि और ग्रामीण क्षेत्र के विकास और सशक्तिकरण की अपार संभावनाएं हैं। इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ‘सहकार से समृद्धि’ के मंत्र के साथ सहकारिता क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है।

अमित शाह ने सिलसिलेवार एक के बाद एक कई ट्वीट कर रिजर्व बैंक के फैसले से सहकारिता क्षेत्र और लोगों को होने वाले फायदे को गिनाते हुए लिखा, आज मुझे ये बताते हुए अत्यंत हर्ष हो रहा है कि आबीआई ने सहकारी क्षेत्र के लिए तीन बहुत महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णयों की घोषणा की है। सर्वप्रथम, शहरी सहकारी बैंकों के लिए व्यक्तिगत आवास ऋण की सीमा को दोगुना एवं ग्रामीण सहकारी बैंकों की सीमा को दोगुने से अधिक किया गया है।

उन्होंने अगले ट्वीट में लिखा, इस निर्णय से टीयर-1 के शहरी सहकारी बैंकों के लिए व्यक्तिगत आवास ऋण की सीमा को 30 लाख से बढ़ाकर 60 लाख रुपये, टीयर-2 के लिए 70 लाख से बढ़ाकर 1.40 करोड़ और ग्रामीण सहकारी बैंकों की सीमा को 20 लाख व 30 लाख से बढ़ाकर क्रमश: 50 लाख व 75 लाख किया गया है। आरबीआई के दूसरे निर्णय से मिलने वाले लाभ के बारे में बताते हुए शाह ने आगे लिखा, दूसरे प्रमुख निर्णय में ग्रामीण सहकारी बैंकों को वाणिज्यिक रियल एस्टेट आवासीय आवास क्षेत्र को ऋण देने की अनुमति दी गयी है। इस महत्वपूर्ण निर्णय से हमारे ग्रामीण सहकारी बैंकों का दायरा और बढ़ेगा। साथ ही लोगों को किफायती घर देने के संकल्प को भी गति मिलेगी।

आरबीआई के तीसरे निर्णय से होने वाले फायदे के बारे में बताते हुए शाह ने अगले ट्वीट में लिखा, तीसरे निर्णय में शहरी सहकारी बैंकों को अपने ग्राहकों को डोर स्टेप बैंकिंग की सुविधा प्रदान करने की अनुमति दी है। इस निर्णय से प्रतिस्पर्धी बैंकिंग क्षेत्र में सहकारी बैंकों को लेवल प्लेइंग फील्ड मिलेगा और वो अन्य बैंकों की तरह ग्राहकों को घर-घर जाकर बैंकिंग सुविधाएं दे पायेंगे। अमित शाह ने सहकारिता मंत्रालय की तरफ से प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताते हुए कहा कि एक साल से भी कम की अवधि में नरेंद्र मोदी ने सहकारिता क्षेत्र के लिए कई ऐतिहासिक निर्णय लिए, जिनकी जरूरत इस क्षेत्र को लंबे समय से थी।

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